मोतिहारी (बिहार): अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बिहार के मोतिहारी जिले में भगवान परशुराम की जयंती पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। राष्ट्रीय ब्राह्मण संघ द्वारा एनएच (NH) बायपास स्थित सतवींन विवाह भवन में आयोजित इस भव्य समारोह में समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान परशुराम की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर की गई।
समाज की मजबूती और एकजुटता पर चर्चा
पूजा-अर्चना के बाद आयोजित गोष्ठी में ब्राह्मण समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान समाज के प्रबुद्ध जनों ने अपने विचार साझा किए।
प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे:
श्री चंद्रकिशोर मिश्रा, जितेंद्र तिवारी, नरेश पांडेय, सुशील पाठक, अनिकेत पांडेय, रजत पाठक, पुष्कर झा, राहुल आर पांडेय, अमित पाठक, पंकज द्विवेदी के साथ-साथ प्रसिद्ध महिला समाजसेवी मिनी द्विवेदी और गायिका सलोनी कुमारी ने भी अपने संबोधन से समाज का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ शिक्षक श्री संजय तिवारी ने किया, जबकि अध्यक्षता श्री अखिलेश कुमार मिश्रा द्वारा की गई।
”अन्याय के विरुद्ध शस्त्र और शास्त्र का संगम हैं भगवान परशुराम”
राष्ट्रीय ब्राह्मण संघ के पदाधिकारियों ने समाज को भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। संघ के सचिव श्री चंद्रमोहन मिश्रा ने कहा:
”भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का फरसा केवल एक हथियार नहीं, बल्कि वीरता और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने हमेशा निर्बलों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और आज के समय में भी उनके सिद्धांतों की बहुत आवश्यकता है।”
मुख्य अतिथि मुकेश पाठक ने अपने प्रभावशाली संबोधन में वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही भगवान परशुराम को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परशुराम जयंती केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ संघर्ष और एकजुट होने का संदेश है।
शस्त्र और शास्त्र का महत्व
संगठन के मुख्य कार्यकर्ता अमित पाठक ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान परशुराम साहस, ज्ञान और शक्ति के अनूठे संगम थे। उन्होंने शस्त्र (शक्ति) और शास्त्र (ज्ञान) दोनों में निपुणता हासिल की थी। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
कार्यक्रम की खास बातें:
- वैदिक परंपरा: पूजा के दौरान शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय रहा।
- महिला सशक्तिकरण: कार्यक्रम में महिला समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।
- संकल्प: उपस्थित लोगों ने समाज में शिक्षा के प्रचार और गरीब वर्गों की सहायता का संकल्प लिया।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह (मोतिहारी)






