मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): बिहार सरकार के निर्देशानुसार जिले में 8वां पोषण पखवाड़ा जोर-शोर से चलाया जा रहा है। इसी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (डीपीओ) सुश्री निधि कुमारी ने बंजरिया प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
केंद्रों पर दिखी हलचल: गोद भराई और अन्नप्राशन का आयोजन
निरीक्षण के दौरान डीपीओ ने पाया कि केंद्रों पर समुदाय आधारित गतिविधियों (CBE) का सफल संचालन किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इन पारंपरिक माध्यमों से ग्रामीणों को सही पोषण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया जा रहा है।
बच्चों की सेहत पर नजर: वजन और ऊंचाई की हुई जांच
सुश्री निधि कुमारी ने केंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों और बच्चों की उपस्थिति का बारीकी से मिलान किया। उन्होंने खुद अपनी देखरेख में बच्चों के वजन और उनकी लंबाई मापने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने सेविकाओं को सख्त निर्देश दिए कि:
- कुपोषित और अति-कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता में कोई कमी न रहे।
- धात्री माताओं (स्तनपान कराने वाली माताएं) को बच्चे के शुरुआती 1,000 दिनों के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए।
डिजिटल ट्रैकिंग पर जोर: ‘जन आंदोलन डैशबोर्ड’ होगा अपडेट
निरीक्षण के दौरान जिला समन्वयक कामरान आलम भी मौजूद रहे। उन्होंने केंद्रों पर डेटा प्रबंधन को लेकर निर्देश दिए कि पोषण ट्रैकर ऐप पर सभी जानकारियां समय पर अपलोड होनी चाहिए।
डीपीओ ने महिला पर्यवेक्षिका विमल गुप्ता और प्रखंड समन्वयक शिवानी सिल्की को निर्देशित किया कि विभागीय कैलेंडर के अनुसार प्रतिदिन की गतिविधियों को अनिवार्य रूप से जन आंदोलन डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाए।
“हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी हर सरकारी सेवा शत-प्रतिशत पात्र महिलाओं और कुपोषित बच्चों तक पहुंचे। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” > — सुश्री निधि कुमारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (ICDS)
क्या है पोषण पखवाड़ा? (पाठकों के लिए जानकारी)
पोषण पखवाड़ा केंद्र और राज्य सरकार का एक संयुक्त अभियान है, जिसका लक्ष्य कुपोषण को जड़ से खत्म करना है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और 6 साल से कम उम्र के बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता फैलाई जाती है।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।






