मोतिहारी, बिहार: चंपारण की धरती पर स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU) ने अपने विकास की यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ लिया है। विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर देश की कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री सैयद अता हसनैन, राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह और उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी सहित कई दिग्गज मौजूद रहे।
संघर्ष से सफलता तक का सफर: मोदी सरकार की देन
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने विश्वविद्यालय की स्थापना के संघर्ष को याद किया। बताया गया कि एक समय था जब तत्कालीन सरकारों ने मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय की संभावनाओं को नकार दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प के कारण आज यह संस्थान हकीकत बना है। आज यह विश्वविद्यालय एक ऐसे ‘चंपा के पेड़’ की तरह विकसित हो रहा है, जिसकी खुशबू देश-विदेश तक पहुँच रही है।
मिनी भारत का स्वरूप बना विश्वविद्यालय
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रह गया है। यहाँ हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों (सिक्किम, मेघालय, असम) तक के छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पूर्व में बांग्लादेश और अफ्रीका के छात्र भी यहाँ से शिक्षा पा चुके हैं। आने वाले समय में इसे नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के लिए शिक्षा का पहला विकल्प बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगा विकास को नया आयाम
क्षेत्र में हो रहे सड़क और परिवहन सुधारों का सीधा लाभ विश्वविद्यालय को मिलेगा।
- कनेक्टिविटी: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे, पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे से यहाँ पहुँचना आसान होगा।
- हवाई संपर्क: उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में स्थानीय हवाई पट्टी के निर्माण की उम्मीद भी जताई गई है, जिससे विदेशी छात्रों और विशेषज्ञों का आना सुगम होगा।
स्थानीय उत्पादों और आधुनिक तकनीक का संगम
विश्वविद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। यहाँ के छात्र और शिक्षक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार (Innovation) कर रहे हैं:
- लोकल फॉर वोकल: मैनेजमेंट फेस्ट में मखाना और सत्तू जैसे स्थानीय उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग पर शोध किया जा रहा है।
- पारंपरिक औषधि: प्राचीन लोककथाओं में छिपी पारंपरिक औषधियों की खोज पर काम चल रहा है।
- साहित्य और संस्कृति: भोजपुरी, मैथिली और भारतीय संत साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।
- भविष्य की तकनीक: ‘पार्लियामेंट्री रिपोर्टिंग’ से लेकर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)’ के नैतिक उपयोग तक पर वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं।
डिग्री केवल कागज नहीं, चरित्र है असली पहचान
समारोह के अंत में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा गया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनकर समाज की सेवा करना है। गांधी जी के आदर्शों को याद करते हुए युवाओं से ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया गया।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)
प्रकाशन: सच्चा समाचार ब्यूरो






