बिहार के पूर्वी चंपारण जिले (मोतिहारी) से एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है। रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से दो युवकों की तबीयत बिगड़ गई है। इस घटना में एक युवक ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है, वहीं गांव में एक अन्य व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर से सनसनी फैल गई है।
कैसे बिगड़ी युवकों की हालत?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम बालगंगा गांव के कुछ युवकों ने कथित तौर पर स्प्रिट मिली हुई शराब का सेवन किया था। शराब पीने के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी।
पीड़ित लोहा ठाकुर ने बताया कि उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर नशीले पदार्थ का सेवन किया था। सेवन के बाद उन्हें तेज सिरदर्द और बेचैनी होने लगी। इनमें से एक साथी की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई। फिलहाल पीड़ितों का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है, जहाँ डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
परिजनों का दर्द और स्थानीय लोगों का आक्रोश
पीड़ित लोहा सिंह की पत्नी ने बताया कि बार-बार मना करने के बावजूद उनके पति ने नशा किया, जिसके बाद सुबह से ही उनकी तबीयत खराब होने लगी। वहीं, स्थानीय वार्ड पार्षद रमाशंकर ठाकुर ने गांव का दौरा कर पीड़ितों का हाल जाना और घटना पर चिंता व्यक्त की।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में अवैध शराब का धंधा लंबे समय से फल-फूल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद चोरी-छिपे शराब की बिक्री जारी है, जिससे निर्दोष लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और स्पष्टीकरण
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने गांव में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है ताकि शराब के मुख्य स्रोत का पता लगाया जा सके।
एसपी का आधिकारिक बयान:
पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
”एक युवक की मौत की सूचना मिली है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार वह पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। मौत का सटीक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा। बीमार पड़े दो युवकों के मामले की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस अपराधियों की तलाश में जुटी है।”
जहरीली शराब: जानलेवा क्यों है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध रूप से बनाई गई शराब में मिथेनॉल (Methanol) जैसे घातक रसायनों की मिलावट की जाती है। यह केमिकल शरीर में जाते ही आंखों की नसों को सुखा देता है, जिससे व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। अधिक मात्रा होने पर यह लिवर और किडनी को फेल कर देता है, जिससे तत्काल मृत्यु भी हो सकती है।
बिहार में साल 2016 से शराबबंदी कानून लागू है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था और जागरूकता पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और पुलिस द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।
रिपोर्टर – अमरजीत सिंह (मोतिहारी)






