बिहार के मोतिहारी में विकास की रफ्तार के बीच एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। छतौनी इलाके में बन रहे ओवरब्रिज ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। पिछले डेढ़ साल से जारी इस निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल अब लोगों के स्वास्थ्य और रोजगार के लिए खतरा बन गई है।
निर्माण कार्य में लापरवाही: धूल से ढका छतौनी इलाका
मोतिहारी के छतौनी में ओवरब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे भविष्य में यातायात सुगम होने की उम्मीद है। हालांकि, वर्तमान स्थिति इसके उलट है। निर्माण स्थल पर भारी वाहनों की आवाजाही से दिन भर धूल का गुबार उड़ता रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा धूल को दबाने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिससे पूरा इलाका धूल की चादर में लिपटा रहता है।
व्यापार और स्वास्थ्य पर बुरा असर
धूल की इस समस्या ने न केवल आम जनता बल्कि स्थानीय व्यापारियों को भी संकट में डाल दिया है:
- बीमारियों का खतरा: लगातार धूल के संपर्क में रहने से लोग सांस की बीमारियों और एलर्जी का शिकार हो रहे हैं।
- व्यापार में गिरावट: सड़कों के किनारे स्थित दुकानों के सामान धूल से खराब हो रहे हैं, जिससे ग्राहकों ने आना कम कर दिया है।
- राहगीरों की परेशानी: पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए बिना चेहरा ढके इस रास्ते से गुजरना असंभव हो गया है।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नाराजगी
स्थानीय निवासी बीरेन्द्र पटेल और अन्य लोगों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे इस समस्या को लेकर असहाय महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग से अक्सर बड़े नेता और अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता।
”हम गरीब लोग धूल-मिट्टी के बीच रहने को मजबूर हैं। न तो नगर निगम और न ही ठेकेदार पानी का छिड़काव कराते हैं। हमारे सांसद राधा मोहन सिंह और विधायक प्रमोद कुमार को भी इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए।” – स्थानीय निवासी
क्या कागजों तक सीमित है पानी का छिड़काव?
निर्माण स्थल पर मौजूद लोगों का दावा है कि ठेकेदार से शिकायत करने पर छिड़काव की बात कही जाती है, लेकिन हकीकत में जमीन सूखी पड़ी रहती है। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन की फाइलों में ही पानी का छिड़काव किया जा रहा है? निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए और निर्माण कार्य के दौरान धूल प्रबंधन के नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
निष्कर्ष
विकास जरूरी है, लेकिन जनता की सेहत की कीमत पर नहीं। मोतिहारी प्रशासन को चाहिए कि वह ठेकेदार को सख्त निर्देश दे ताकि निर्माण कार्य के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के मानकों का भी ख्याल रखा जा सके।






