बिहार 

मोतिहारी: 20 साल से अधूरे पुल की सजा भुगत रहे ग्रामीण, हर दिन 22 KM का अतिरिक्त सफर करने की मजबूरी

On: March 30, 2026 10:35 PM
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​पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के रघुनाथपुर प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो आधुनिक विकास के दावों पर सवालिया निशान लगाती है। यहाँ की धनौती नदी पर एक पुल का निर्माण पिछले दो दशकों से अटका हुआ है। आलम यह है कि चैलाहा गौशाला से बालगंगा को जोड़ने वाला यह पुल आज भी सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है।

​वादे हुए पुराने, पर खत्म नहीं हुआ इंतजार

​करीब 20 साल पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादों के साथ इस पुल की नींव रखने का सपना दिखाया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पुल बनते ही उनके क्षेत्र की किस्मत बदल जाएगी। लेकिन वक्त बीतता गया और वे वादे सिर्फ चुनावी भाषणों तक ही सीमित रह गए। बजट की कमी और प्रशासनिक सुस्ती ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

​”क्या हम विकास के नक्शे में भी हैं?”

​स्थानीय निवासी रामविलास यादव भावुक होकर पूछते हैं, “क्या हमारा गाँव विकास के नक्शे में है भी या नहीं? इस नदी में गिरकर आए दिन हादसे होते हैं, लोग जान गंवा देते हैं। अगर पुल होता, तो शायद कई अपनों की जान बच जाती।” ग्रामीणों का कहना है कि वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

​22 किलोमीटर का दर्द और हर दिन की जद्दोजहद

​पुल न होने का सीधा असर यहाँ के हजारों लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने के लिए ग्रामीणों को 22 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटना पड़ता है।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर: स्कूल जाने वाले बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए यह दूरी जानलेवा साबित होती है। समय पर अस्पताल न पहुँच पाना यहाँ की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है।
  • किसानों की कमर टूटी: किसान अपनी फसल को बाजार तक ले जाने में असमर्थ हैं। लंबा रास्ता होने के कारण परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत का सही मोल नहीं मिल पाता।

​ग्रामीणों का संघर्ष: चंदे के पुल का सहारा

​प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीण अक्सर आपस में चंदा इकट्ठा कर अस्थायी पुल (चचरी पुल) का निर्माण करते हैं, लेकिन मानसून आते ही धनौती नदी का तेज बहाव उसे बहा ले जाता है। हर साल यह सिलसिला दोहराया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

विशेष नोट: यह रिपोर्ट मोतिहारी के ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे की कमी और उससे प्रभावित जनजीवन की वास्तविकता को दर्शाती है। स्थानीय लोगों की अब एक ही मांग है— “फाइलों से बाहर निकले पुल और शुरू हो निर्माण।”

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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