पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के जिलाधिकारी श्री सौरभ जोरवाल ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभागार में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुँचाना सुनिश्चित करें।
चमकी बुखार (AES) को लेकर अलर्ट, वार्डों को तैयार रखने के निर्देश
गर्मी के मौसम को देखते हुए चमकी बुखार (AES) की रोकथाम जिलाधिकारी की प्राथमिकता में रही। उन्होंने सभी चिकित्सा प्रभारियों (MOIC) और अस्पताल अधीक्षकों को निर्देश दिए कि:
- सभी स्वास्थ्य केंद्रों (CHC/PHC) और जिला अस्पताल में AES वार्डों को पूरी तरह सुसज्जित रखा जाए।
- दवाइयों की उपलब्धता में कोई कमी न आए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इसके लक्षणों और बचाव के प्रति सचेत किया जाए।
नियमित टीकाकरण और परिवार कल्याण पर जोर
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने सभी प्रभारियों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया। इसके साथ ही, परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत महिला बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी और IUCD जैसे लक्ष्यों को हासिल करने की बात कही गई ताकि परिवार नियोजन की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल सकें।
’भव्य’ कार्यक्रम और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में चल रहे ‘भव्य’ (Bhavya) कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल मोतिहारी सहित सभी केंद्रों पर इस डिजिटल स्वास्थ्य पहल को बेहतर बनाने और तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए।
इन प्रमुख सेवाओं की भी हुई समीक्षा:
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई:
- संस्थागत प्रसव: अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की संख्या बढ़ाने पर जोर।
- e-संजीवनी: टेली-मेडिसिन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना।
- ओपीडी और आईपीडी: अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधा प्रदान करना।
- मातृ मृत्यु दर: मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रसव पूर्व जांच (ANC) को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार, अस्पताल उपाधीक्षक, डीपीएम (DPM), सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य प्रबंधक मौजूद रहे। साथ ही, स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे यूनिसेफ (UNICEF), केयर (CARE) और डब्ल्यूएचओ (WHO) के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
निष्कर्ष: जिलाधिकारी के इन सख्त निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासन आने वाले महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर पूरी तरह गंभीर है।






