बिहार 

भागलपुर में खिलेगा कमल या फिर टूटेगा बीजेपी का किला? अनुराग ठाकुर के बयान से गरमाई सियासत

On: September 12, 2025 8:00 PM
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भागलपुर में खिलेगा कमल या फिर टूटेगा बीजेपी का किला? अनुराग ठाकुर के बयान से गरमाई सियासत
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बिहार की राजनीति हमेशा से पूरे देश का ध्यान खींचती रही है। यहां होने वाले हर चुनाव नतीजे सिर्फ राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करते हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भागलपुर दौरे के दौरान बड़ा बयान देकर सियासी माहौल को और गरमा दिया है।

अनुराग ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष पर सीधा हमला बोला और कहा कि कांग्रेस और राजद बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां का अपमान करते रहे हैं। उन्होंने इसे बिहार की धरती का अपमान बताया और दावा किया कि राज्य की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।


“आपका वोट है?” – अनुराग का तीखा सवाल

इंटरव्यू के दौरान अनुराग ठाकुर ने बार-बार जनता से एक ही सवाल किया –
“आपका वोट है? आपका वोट है?”

उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले से ही बहाने बना रहा है और चुनाव आयोग, ईवीएम और अब एसआईआर जैसे मुद्दों पर हार की जमीन तैयार कर रहा है। ठाकुर ने कहा कि “भाइयों और बहनों, क्या आपका वोट कटा है? नहीं कटा ना… तो फिर ये लोग क्यों बार-बार हार का ठीकरा व्यवस्था पर फोड़ते हैं?”

उनका कहना था कि कांग्रेस और राजद चुनाव हारने के बाद जनता का सामना करने से बचने के लिए हमेशा किसी न किसी संस्था को निशाना बनाते हैं।


भागलपुर पर क्यों गरमाई सियासत?

भागलपुर सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन पार्टी यहां लगातार तीन चुनाव से पराजित हो रही है। यही वजह है कि जब अनुराग ठाकुर से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा –

“भागलपुर का भाग्य बदलेगा। इस बार रिकॉर्ड मतों से जीत होगी और कमल जरूर खिलेगा।”

उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता “जंगल राज” में लौटना नहीं चाहती और एनडीए को ही दोबारा सत्ता सौंपेगी।


विपक्ष पर तंज – “मन की आवाज का नतीजा देख लीजिए”

अनुराग ठाकुर ने हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव का उदाहरण देते हुए विपक्ष पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि “विपक्ष ने अपने नेताओं से कहा था कि अंतरात्मा की आवाज सुनकर वोट दें। नतीजा क्या हुआ? उनके ही वोट दूसरी तरफ चले गए और सीपी राधाकृष्णन रिकॉर्ड मतों से जीत गए।”

इस उदाहरण के जरिए ठाकुर ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष का एकजुट रहना नामुमकिन है और उनकी रणनीति हर बार खुद उनके खिलाफ ही चली जाती है।


बिहार की राजनीति और जनता की प्राथमिकताएं

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण, विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार हमेशा अहम मुद्दे रहे हैं।

  • एनडीए का दावा: बिहार ने पिछले कई सालों में विकास की रफ्तार देखी है। एनडीए कहता है कि जनता अब “जंगल राज” में लौटना नहीं चाहती और स्थिर सरकार को ही चुनेगी।
  • विपक्ष का रुख: दूसरी ओर, कांग्रेस और राजद लगातार सरकार पर आरोप लगाते हैं कि रोजगार सृजन, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार नाकाम रही है।

अनुराग ठाकुर का बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि भागलपुर जैसे इलाके में बीजेपी की स्थिति को लेकर लगातार चर्चा हो रही थी। उनका दावा कि “इस बार रिकॉर्ड मतों से जीत होगी” निश्चित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम करता है।


चुनाव आयोग और ईवीएम पर बहस

हर चुनाव में विपक्ष ईवीएम पर सवाल उठाता रहा है। इस बार भी कांग्रेस और राजद ने आरोप लगाए हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है। लेकिन अनुराग ठाकुर ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “अगर ईवीएम गड़बड़ होती तो उपराष्ट्रपति चुनाव में भी नतीजे अलग होते। लेकिन वहां पर्ची से वोट डाले गए और 15 वोट खराब हो गए। आखिर ये जिम्मेदारी किसकी है?”

उनका यह बयान विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब माना जा रहा है।


बिहार की जनता का मूड – किसके साथ?

बिहार की जनता इस बार किसे मौका देगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन यह साफ है कि सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

  • बीजेपी और एनडीए अपनी सरकार के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था सुधार को मुद्दा बना रहे हैं।
  • राजद और कांग्रेस रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार के सवालों को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं।

भागलपुर जैसी सीट पर जीत-हार का असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करेगा।


निष्कर्ष

अनुराग ठाकुर के हालिया बयान से साफ है कि बीजेपी इस बार भागलपुर सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। लगातार तीन हार के बाद अब पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है।

जहां एक ओर उन्होंने कांग्रेस और राजद पर तीखे हमले बोले, वहीं दूसरी ओर आत्मविश्वास से दावा किया कि “भागलपुर में कमल खिलेगा और बिहार में एनडीए की सरकार पहले से ज्यादा सीटों के साथ बनेगी।”

अब देखना यह होगा कि बिहार की जनता किस पर भरोसा जताती है – एनडीए के दावों पर या विपक्ष के सवालों पर। चुनावी नतीजे ही इसका असली जवाब देंगे।

Sachcha Samachar Desk

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