दिल्ली में आयोजित 56वीं जीएसटी (GST) काउंसिल की बैठक में आम जनता, मध्यमवर्गीय परिवारों, ग्रामीण इलाकों और छोटे उद्यमों को राहत देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में कटौती की सिफारिश की गई।
काउंसिल के मुताबिक, हाउसिंग सेक्टर, छोटे उद्यम, ग्रामीण परिवार और पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग सबसे बड़े लाभार्थी साबित होंगे। आइए विस्तार से जानते हैं किन-किन वस्तुओं पर टैक्स घटाया गया और इसका आपके जीवन पर क्या असर पड़ेगा।
हाउसिंग सेक्टर को बड़ी राहत – अब सस्ता होगा घर बनाना
बैठक में मार्बल और ग्रेनाइट ब्लॉक्स पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
👉 पहले जहां मकान बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्बल और ग्रेनाइट पर अधिक टैक्स देना पड़ता था, वहीं अब दर घटने से निर्माण लागत कम होगी।
👉 राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में इन पत्थरों का उत्पादन होता है, जिससे स्थानीय खनन उद्योग को भी फायदा होगा।
इसके अलावा, सैंड लाइम ब्रिक्स (ईंटें) और स्टोन इनले वर्क पर भी जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। यह फैसला खासकर ग्रामीण इलाकों में कम लागत वाले आवास के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
रसोई के बर्तन और घरेलू सामान होंगे सस्ते
आम घरों की जरूरत को देखते हुए जीएसटी काउंसिल ने अल्यूमिनियम के दूध के डिब्बे (Milk Cans), कॉपर/अल्यूमिनियम से बने टेबल, किचन और घरेलू सामान पर टैक्स 12% से घटाकर 5% करने का ऐलान किया है।
- पहले जहां इन सामानों की कीमत ज्यादा पड़ती थी, अब टैक्स कम होने से खुदरा बाजार में कीमत घटेगी।
- इससे मध्यवर्गीय परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
- साथ ही, प्लास्टिक के विकल्प के रूप में ये टिकाऊ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर साबित होंगे।
यह फैसला MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों) के लिए भी वरदान है, क्योंकि इन वस्तुओं का उत्पादन बड़े पैमाने पर छोटे उद्योग करते हैं। टैक्स घटने से इनकी मांग बढ़ेगी और नए बाजार खुलेंगे।
ग्रामीण परिवारों को फायदा – सस्ता हुआ प्रेशर स्टोव
ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए ब्रास केरोसिन प्रेशर स्टोव पर जीएसटी दर घटाकर 12% से 5% कर दी गई है।
👉 इस फैसले से गांव-देहात में खाना बनाने के साधन अब और सस्ते होंगे।
👉 ऊर्जा तक सभी की पहुंच (Energy Access for All) सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम अहम है।
हस्तशिल्प उद्योग को नई जान
भारत की पहचान रहे ब्रास, कॉपर/कॉपर अलॉय (निकेल/सिल्वर इलेक्ट्रोप्लेटेड) और अल्यूमिनियम के हैंडीक्राफ्ट पर जीएसटी दर घटाकर 12% से 5% कर दी गई है।
👉 यह कदम छोटे कारीगरों और हस्तशिल्प उद्यमियों के लिए राहत लेकर आया है।
👉 टैक्स घटने से इनके प्रोडक्ट्स की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहक आधार भी व्यापक होगा।
👉 साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में यह निर्णय अहम साबित होगा।
खनन और खनिज उद्योग को भी राहत
जीएसटी काउंसिल ने सेवाओं पर भी राहत दी है। मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट ऑफ गुड्स (देश के भीतर सामान ढुलाई) की दर 12% से घटाकर 5% (सीमित क्रेडिट के साथ) कर दी गई है।
👉 खासकर खनन और खनिज उद्योग, जैसे आयरन ओर (Iron Ore), जिसमें लंबी दूरी की ढुलाई शामिल होती है, इस फैसले से सीधा लाभ उठाएंगे।
👉 इससे परिवहन लागत कम होगी और खनिज आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
जीएसटी दरों में बदलाव – एक नजर
| वस्तु/सेवा | पुरानी दर | नई दर |
|---|---|---|
| मार्बल और ग्रेनाइट ब्लॉक्स | 12% | 5% |
| सैंड लाइम ब्रिक्स / स्टोन इनले वर्क | 12% | 5% |
| अल्यूमिनियम दूध डिब्बे, किचन आर्टिकल्स | 12% | 5% |
| कॉपर/अल्यूमिनियम घरेलू सामान | 12% | 5% |
| ब्रास केरोसिन प्रेशर स्टोव | 12% | 5% |
| ब्रास/कॉपर/अल्यूमिनियम हस्तशिल्प | 12% | 5% |
| मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट ऑफ गुड्स (भारत में) | 12% | 5% |
आम आदमी से लेकर उद्योग तक – सबको फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी दरों में यह कटौती सिर्फ टैक्स रिफॉर्म नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुधार की दिशा में कदम है।
- आम आदमी को रसोई से लेकर मकान बनाने तक में खर्च घटेगा।
- ग्रामीण परिवारों को सस्ते ईंधन उपकरण और निर्माण सामग्री मिलेगी।
- MSMEs और कारीगरों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
- खनन और खनिज उद्योग की लागत घटेगी, जिससे रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए फैसले आम जनता, मध्यम वर्ग, ग्रामीण समुदाय और छोटे उद्योगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आए हैं।
निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने यह संदेश दिया है कि सरकार टैक्स सुधारों के जरिए न सिर्फ उद्योग बल्कि हर तबके तक लाभ पहुंचाना चाहती है।
अब देखना यह होगा कि बाजार में इन फैसलों का असर कितनी तेजी से दिखाई देता है और आम उपभोक्ता कब तक सस्ती दरों पर इनका लाभ उठा पाएंगे।








