बिहार 

मुंगेर किला पर लगे पोस्टर से मचा सियासी बवाल, जनता के बीच चर्चाओं का दौर तेज

On: September 6, 2025 9:03 PM
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मुंगेर किला पर लगे पोस्टर से मचा सियासी बवाल, जनता के बीच चर्चाओं का दौर तेज
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मुंगेर, बिहार। बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर से गर्माई हुई है। मुंगेर किला के मुख्य द्वार पर लगाए गए एक पोस्टर ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी हलचल पैदा कर दी है। इस पोस्टर में लिखा गया है – “लगता है वोट चोरी संभव नहीं, अम्मा के नाम पर वोट दे दे रे बाबा।” यह वाक्य सिर्फ एक साधारण पोस्टर का हिस्सा भर नहीं रहा, बल्कि अब यह प्रदेश की सियासत में बहस और आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।

पोस्टर से उठा विवाद

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर कुछ अपशब्द कहे जाने का मामला सुर्खियों में रहा। उसी के बाद यह पोस्टर सामने आया है, जिसमें सीधे तौर पर ‘अम्मा’ शब्द का जिक्र किया गया है। हालांकि पोस्टर पर न तो किसी पार्टी का नाम अंकित है और न ही पोस्टर लगाने वाले का। यही कारण है कि इस पोस्टर को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

स्थानीय लोग इस पोस्टर को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कोई इसे विपक्ष का हथकंडा बता रहा है तो कोई इसे भाजपा और एनडीए के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार से जोड़कर देख रहा है।

भाजपा विधायक का पलटवार

मुंगेर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रणव कुमार ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे पोस्टर लगाकर विपक्ष जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
विधायक प्रणव कुमार ने कहा –
“बिहार की जनता आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ है। विपक्ष पूरी तरह हताश और निराश हो चुका है। कभी वे वोट चोरी का आरोप लगाते हैं, तो कभी बेबुनियाद बातें करते हैं। इस तरह के पोस्टरों से कुछ हासिल होने वाला नहीं है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर पोस्टर असली है और किसी राजनीतिक दल से जुड़ा है, तो उसे अपना नाम स्पष्ट करना चाहिए। बिना नाम लिखे इस तरह की बातें करना विपक्ष की “ओछी मानसिकता” को दर्शाता है।

जनता के बीच चर्चा

मुंगेर किला क्षेत्र में लगे इस पोस्टर को लेकर आम लोगों में भी चर्चा का दौर जारी है। कई लोगों का कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह की रणनीतियाँ आमतौर पर देखने को मिलती हैं। कुछ नागरिक इसे विपक्ष की चाल बताते हैं, तो कुछ इसे भाजपा को निशाने पर लेने की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।

स्थानीय राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस तरह के पोस्टर, चाहे किसी ने भी लगाए हों, जनता की सोच और मतदान के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश भर होते हैं। लेकिन बिहार की जनता अब जागरूक है और अपने अनुभव के आधार पर निर्णय लेती है।

विपक्ष की चुप्पी

इस पोस्टर के सामने आने के बाद भाजपा और उसके नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा है। लेकिन अभी तक कांग्रेस या राजद की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विपक्ष इस पूरे प्रकरण को लेकर सावधानी बरत रहा है ताकि मामला और न बिगड़े।

विकास बनाम आरोप की राजनीति

भाजपा विधायक ने अपने बयान में बिहार में हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में महिला सशक्तिकरण और विकास की कई मिसालें स्थापित हुई हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से विपक्ष घबराया हुआ है और निराशा में इस तरह की रणनीतियाँ अपनाता है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में जनता एक बार फिर से “विकास बनाम आरोपों की राजनीति” को लेकर मतदान करेगी। विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष अपने विकास कार्यों का हवाला देकर जनता से समर्थन मांग रहा है।

पोस्टर क्यों है अहम?

इस पोस्टर का सबसे अहम पहलू यह है कि इसमें ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल हुआ है। हाल ही में प्रधानमंत्री की मां को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद अब यह पोस्टर उसी संदर्भ में जोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि इसका राजनीतिक महत्व और भी बढ़ गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पोस्टर का समय भी अहम है। जब राज्य में चुनावी हलचल तेज है, तब इस तरह का पोस्टर जनता का ध्यान खींचने और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए काफी है।

जनता का रुख क्या होगा?

हालांकि पोस्टर लगाने वाले का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन इसका असर चुनावी माहौल पर देखा जा रहा है। लोग आपस में इस पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अंततः जनता का रुख विकास और अपने स्थानीय मुद्दों पर ही तय होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर ही वोट करने का मन बना रहे हैं।

निष्कर्ष

मुंगेर किला पर लगा यह पोस्टर बिहार की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर चुका है। भाजपा ने इसे विपक्ष की हताशा बताया है, जबकि विपक्ष अब तक खामोश है। यह मामला आने वाले चुनावों में किस तरह असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
फिलहाल इतना साफ है कि बिहार की राजनीति में पोस्टरबाजी एक पुराना हथकंडा रही है और इस बार भी चुनावी समर में यह हथियार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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