मुंगेर। जनहित की लड़ाई लड़ते-लड़ते एक राजद नेता मौत के मुहाने तक पहुँच गए। यह खबर है मुंगेर से, जहाँ बाढ़ पीड़ितों के लिए मुआवजा दिलाने की माँग को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे राजद नेता अविनाश विद्यार्थी उर्फ़ मुकेश यादव की तबीयत अचानक इतनी बिगड़ गई कि उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
जिंदगी और मौत के बीच झूलते अविनाश, ICU में भर्ती
बरियारपुर प्रखंड कार्यालय के पास मुकेश यादव सिर्फ़ 7000 रुपये के मुआवजे की माँग को लेकर भूख हड़ताल पर थे, लेकिन उनकी इस लड़ाई को जिला प्रशासन ने पूरी तरह नजरअंदाज किया। शुक्रवार को उनकी हालत नाजुक हो गई। अनशन के कारण शुगर लेवल इतना गिर गया और ब्लड प्रेशर इतना कम हो गया कि उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में डालना पड़ा।
गनीमत रही कि परिजनों और समर्थकों ने वक्त रहते उन्हें निजी अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने बताया कि सघन इलाज के बाद अब उनकी हालत खतरे से बाहर है, पर कुछ देर की देरी भारी पड़ सकती थी। यह सिर्फ एक नेता का अनशन नहीं, बल्कि जनता के हक़ की एक ईमानदार आवाज़ थी, जिसे अनसुना किया गया।
मनोज झा अस्पताल पहुँचे, प्रशासन पर भड़के
यह दिल दहला देने वाली खबर जैसे ही पटना पहुँची, सियासी गलियारों में हलचल मच गई। मुंगेर में एक बैठक के लिए आए राजद के राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज झा तत्काल अस्पताल पहुँचे और उनका हालचाल जाना।
डॉक्टरों से पूरी स्थिति की जानकारी लेने के बाद मनोज झा ने प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने साफ किया, “पार्टी अपने नेता के साथ खड़ी है। हम बाढ़ पीड़ितों की इस लड़ाई को यूँ ही नहीं छोड़ेंगे। यह कैसी संवेदनहीनता है कि चार दिन से एक जनप्रतिनिधि अनशन पर है और जिला प्रशासन ने एक बार भी बातचीत करने की ज़रूरत नहीं समझी?” उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है।
”प्रशासन ने मौत का इंतज़ार किया!”— समर्थकों का आक्रोश
राजद नेताओं और स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी गुस्सा है। राजद जिला उपाध्यक्ष संजय पासवान ने गुस्से में कहा, “मुकेश यादव चार दिनों से अपनी जान जोखिम में डालकर भूखे थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। प्रशासन ने कोई इंतज़ाम क्यों नहीं किया? क्या वे किसी बड़ी दुर्घटना या मौत का इंतज़ार कर रहे थे? हमें मजबूरन उन्हें खुद अस्पताल लाना पड़ा।”
यह पूरा आंदोलन उन सैकड़ों बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए है, जिन्हें आज तक सरकारी राहत राशि के 7000 रुपये नहीं मिले हैं। मुकेश यादव और उनके समर्थक साफ कहते हैं कि जब तक पीड़ितों को उनका हक़ नहीं मिल जाता, आंदोलन जारी रहेगा, भले ही अस्पताल के बेड पर लेटना पड़े। इस घटना ने मुंगेर की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर सकता है।










