मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण): बिहार के मोतिहारी जिले में न्याय की गुहार लगा रहे एक परिवादी को बड़ी सफलता मिली है। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के न्यायालय के कड़े रुख के बाद, पुलिस ने अपनी तकनीकी चूक को स्वीकार करते हुए प्राथमिकी (FIR) में सुधार किया है। इस मामले में पुलिस ने न्यायालय को ‘शुद्धि पत्र’ सौंपकर आरोपी का नाम रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला पहाड़पुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ थाना कांड संख्या 184/21 दर्ज की गई थी। परिवादी संजय कुमार सिंह (संपादक) ने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, शैलेन्द्र कुमार भारती के न्यायालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत का मुख्य आधार यह था कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के कॉलम संख्या 7 में एक नामजद अभियुक्त का नाम शामिल होने से छूट गया था।
पुलिस की लापरवाही और शुद्धि पत्र
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के निर्देश के बाद, पहाड़पुर थानाध्यक्ष अजय कुमार ने इस मामले में जांच रिपोर्ट सौंपी। पुलिस ने स्वीकार किया कि दिनांक 16 अगस्त 2021 को धारा 420/34 के तहत दर्ज प्राथमिकी में मानवीय भूल के कारण एक अभियुक्त का नाम अंकित नहीं हो पाया था, जबकि मूल आवेदन में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज था।
थानाध्यक्ष द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) मोतिहारी को भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है:
”पहाड़पुर थाना कांड संख्या 184/21 की प्राथमिकी के कॉलम संख्या 07 में भूलवश अभियुक्त का नाम अंकित करना छूट गया था। अब आरोपी दयाशंकर सिंह उर्फ रोहित राज (पिता- महेन्द्र सिंह, निवासी- बथुआहाँ) का नाम जोड़ने के लिए न्यायालय से आग्रह किया गया है।”
परिवादी को मिला न्याय
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले की कार्रवाई का प्रतिवेदन सौंप दिया गया है। इस सुधार के बाद परिवादी ने राहत की सांस ली है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि यदि पुलिस स्तर पर कोई त्रुटि होती है, तो लोक शिकायत निवारण के माध्यम से नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और न्याय पा सकते हैं।
संपादन नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय संवाददाता अमरजीत सिंह से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।






