पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी (DM) सौरभ जोरवाल के सख्त निर्देशों के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाह कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।
लापरवाही पर बरती सख्ती: अनुपस्थित डॉक्टरों का रुकेगा वेतन
जिलाधिकारी ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने-अपने विभागों की जांच के निर्देश दिए थे। इसके पालन में सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार अचानक सदर अस्पताल पहुंचे। निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने अटेंडेंस रजिस्टर (उपस्थिति पंजी) और ड्यूटी रोस्टर की जांच की, तो कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपनी ड्यूटी से गायब मिले।
प्रमुख कार्रवाई:
- ड्यूटी से गायब मिले सभी डॉक्टरों और कर्मियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया गया है।
- सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सेवा में किसी भी प्रकार की कोयाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गंदगी देख भड़के सिविल सर्जन, दी सख्त चेतावनी
निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने अस्पताल परिसर का कोना-कोना देखा। वहां फैली गंदगी को देखकर उन्होंने भारी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अस्पताल का स्वच्छ होना मरीजों की रिकवरी के लिए सबसे जरूरी है। उन्होंने साफ-सफाई में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी स्थिति मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोटवा पीएचसी प्रभारी पर भी गिरी गाज
प्रशासन की यह जांच केवल सदर अस्पताल तक सीमित नहीं रही। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) ने कोटवा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का भी औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने कार्यालय से नदारद पाए गए।
इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन ने कोटवा पीएचसी प्रभारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-cause notice) जारी कर जवाब मांगा है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिकता
प्रशासन की इस सक्रियता ने यह संदेश साफ कर दिया है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
”जो भी कर्मचारी या चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाएंगे, उन पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।” – स्वास्थ्य विभाग, मोतिहारी
निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और प्रबंधक भी मौजूद रहे। अधिकारियों के इस सख्त रुख से जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी खलबली मची हुई है।






