बिहार 

मोतिहारी: आयुष्मान आरोग्य मंदिर ने स्कूली बच्चों को सिखाए स्वस्थ जीवन के मंत्र, नुक्कड़ नाटक से फैली जागरूकता

On: March 23, 2026 8:46 PM
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बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों पर ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ के तहत स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी के मार्गदर्शन में ‘आयुर्विद्या’ और ‘राज्याभिषेकम’ कार्यक्रमों के जरिए आम जनता और स्कूली बच्चों को आयुर्वेद के महत्व से रूबरू कराया गया।

​स्कूलों में ‘आयुर्विद्या’ कार्यक्रम: बच्चों को मिली बेहतर जीवनशैली की सीख

​पूर्वी चंपारण के विभिन्न प्रखंडों में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों द्वारा स्थानीय विद्यालयों में विशेष सत्र आयोजित किए गए।

  • पाटजिलवा (चिरैया): आयुष्मान आरोग्य मंदिर पाटजिलवा द्वारा राजकीय मध्य विद्यालय में छात्रों को स्वस्थ रहने के तरीके बताए गए।
  • मलकानिया (ढाका): यहाँ के राजकीय मध्य विद्यालय में भी आयुष विशेषज्ञों ने बच्चों को दिनचर्या और योग के लाभ समझाए।

​कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:

​इन सत्रों के दौरान बच्चों और शिक्षकों को निम्नलिखित विषयों पर जानकारी दी गई:

  1. स्वस्थ दिनचर्या: सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की सही आदतें।
  2. योग और प्राणायाम: मानसिक और शारीरिक एकाग्रता के लिए सरल योगाभ्यास।
  3. ऋतुचर्या: बदलते मौसम के अनुसार खान-पान और रहन-सहन में जरूरी बदलाव।
  4. औषधीय पौधे: घर के आसपास मिलने वाले तुलसी, नीम और एलोवेरा जैसे पौधों के स्वास्थ्य लाभ।

​नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को किया जागरूक

​आयुष ग्राम डुभा (छौड़ादानों) में जन-जागरूकता फैलाने के लिए एक अनूठा प्रयास किया गया। यहाँ चार अलग-अलग स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया।

​इन नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को सरल भाषा में बताया गया कि कैसे वे आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाकर बीमारियों से दूर रह सकते हैं। नाटक का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वच्छता, शुद्ध आहार और प्राकृतिक उपचार के प्रति प्रोत्साहित करना था।

​स्वास्थ्य विभाग की अनूठी पहल

​यह पूरा अभियान बिहार स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों पर आधारित है, जिसका लक्ष्य आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को घर-घर तक पहुँचाना है। जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से भविष्य की पीढ़ी न केवल सेहतमंद बनेगी, बल्कि अपनी सांस्कृतिक चिकित्सा पद्धति पर गर्व भी करेगी।

विशेष नोट: अमरजीत सिंह की रिपोर्ट पर आधारित।

Sachcha Samachar Desk

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