भारत और मॉरीशस का रिश्ता सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि दिल से दिल का रिश्ता है—हमारा साझा इतिहास, संस्कृति और विश्वास इसे सदियों से सींचता आया है। इसी पारिवारिक बंधन को और गहरा करने के लिए, मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नविनचंद्र रामगुलाम हाल ही में भारत के राजकीय दौरे पर आए थे। सच कहूँ तो, यह मुलाकात सिर्फ़ नेताओं की नहीं थी, बल्कि दो सच्चे दोस्त और सहयोगी देशों के बीच भविष्य की योजनाओं पर हुई एक गर्मजोशी भरी चर्चा थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बातचीत सिर्फ डिप्लोमेसी तक सीमित नहीं रही। एजेंडे में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोर्ट और रक्षा जैसे क्षेत्र थे—यानी वो सभी चीज़ें जो मॉरीशस के लोगों की ज़िंदगी को सीधे छूती हैं। नतीजा? एक जबरदस्त समझौता! भारत ने मॉरीशस के लिए $675 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 30 अरब मॉरीशस रुपये) का भारी भरकम पैकेज और सहयोग देने का ऐलान किया है। यह रकम सिर्फ डॉलर नहीं है, यह भरोसे और दोस्ती की गारंटी है।
ग्रैंड प्रॉजेक्ट्स: यह है असली ‘मेकओवर’
जरा इन योजनाओं पर नजर डालिए, जो ग्रांट (यानी मुफ्त मदद) के आधार पर बन रही हैं। यह मॉरीशस के सामाजिक ढांचे का एक तरह से बड़ा मेकओवर है:
- नया सर सीवोसागर रामगुलाम नेशनल हॉस्पिटल: क्या बात है! मॉरीशस को सचमुच एक शानदार, आधुनिक अस्पताल की जरूरत थी। यह लोगों की सेहत को एक नई छलांग देगा।
- AYUSH सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: हमारी सदियों पुरानी आयुर्वेद और योग की ताकत अब मॉरीशस पहुँचेगी। यह सेंटर सच में एक गेम चेंजर साबित होगा।
- वेटरनरी स्कूल और हॉस्पिटल: पशुपालन के क्षेत्र में भी पीछे नहीं रहना है। पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए तकनीकी और वित्तीय मदद भारत देगा।
- एक शानदार हेलिकॉप्टर: आपदा हो या निगरानी, भारत मॉरीशस को एक नया हेलिकॉप्टर भी दे रहा है। सुरक्षा पहली प्राथमिकता!
इन सब चीज़ों पर लगभग $215 मिलियन खर्च होंगे। सोचिए, यह कितना बड़ा कदम है।
कनेक्टिविटी और विकास: ग्रांट-कम-LOC का कमाल
कुछ अहम परियोजनाएं ऐसी भी हैं जो ग्रांट और लोन दोनों के मिक्स मॉडल पर चलेंगी, ताकि विकास की गति न रुके। इनकी अनुमानित लागत $440 मिलियन है:
- SSR एयरपोर्ट पर नया ATC टावर: एयरपोर्ट का कंट्रोल सिस्टम और आधुनिक हो जाएगा। उड़ानों के लिए यह सुरक्षित और तेज़ होगा।
- मोटरवे M4 और रिंग रोड फेज II: अरे हाँ! ट्रैफिक से तो हर जगह बुरा हाल है। पोर्ट लुईस में रिंग रोड का दूसरा चरण और नए मोटरवे से रोज़मर्रा की आवाजाही बहुत आसान हो जाएगी।
- पोर्ट के लिए नए उपकरण: समुद्री व्यापार को और मज़बूत करने के लिए ताज़ा, अत्याधुनिक उपकरण चाहिए ही चाहिए।
सामरिक साझेदारी: हिंद महासागर का भविष्य
यह समझौता सिर्फ सड़कों और अस्पतालों तक ही सीमित नहीं है। रणनीतिक रूप से भी यह बहुत मायने रखता है।
- पोर्ट पुनर्विकास: हिंद महासागर में अपनी समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए मॉरीशस के पोर्ट को रीडेवलप किया जाएगा। यह भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- Chagos में सहयोग: पर्यावरण संरक्षण और समुद्री सुरक्षा के लिए चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र में भारत मॉरीशस की मदद के लिए तैयार है।
- 25 मिलियन डॉलर की बजट सहायता: भारत ने तत्काल आर्थिक स्थिरता के लिए $25 मिलियन की सीधी बजट सहायता भी दी है। यह दिखाता है कि भारत संकट के समय मॉरीशस के साथ कितना मज़बूती से खड़ा है।
क्यों यह समझौता सिर्फ नंबर्स से ज़्यादा है
ईमानदारी से कहूँ तो, यह सहयोग केवल आर्थिक निवेश नहीं है। मॉरीशस, भारत की ‘पड़ोस पहले’ नीति और ‘सागर’ (SAGAR) विजन का एक अहम खंभा है।
- यह साझेदारी मॉरीशस की जनता को सीधे-सीधे बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा देगी।
- यह भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में एक मजबूत और विश्वसनीय शक्ति के तौर पर मौजूदगी सुनिश्चित करेगी।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी और रामगुलाम की इस मुलाकात ने साबित कर दिया है कि भारत-मॉरीशस का रिश्ता सिर्फ सरकारी नहीं, बल्कि पारिवारिक है। $675 मिलियन की यह पहल दोनों देशों के लिए एक विन-विन सिचुएशन है, जो हमें अगले कई दशकों तक विकास और विश्वास के रास्ते पर ले जाएगी।
क्या आपको नहीं लगता कि यह समझौता दोनों देशों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है?










