मुंगेर (बिहार)। बिहार के मुंगेर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने खेल प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों, दोनों को चौंका दिया है। यहां के जिलाधिकारी (DM) निखिल धनराज ने सिर्फ अपनी कुर्सी नहीं संभाली, बल्कि मैदान पर उतरकर खुद को एक बेहतरीन फुटबॉलर भी साबित कर दिया। उन्होंने केवल उपस्थिति दर्ज नहीं कराई—बल्कि शीतलपुर क्लब की टीम के लिए फाइनल में निर्णायक गोल दागकर खिताबी जीत दिलवाई!
जी हाँ, यह सचमुच ऐतिहासिक क्षण था जो रविंद्र प्रसाद सिंह जिला फुटबॉल लीग के फाइनल मुकाबले में देखने को मिला। मुंगेर का पोलो मैदान इस रोमांचक नजारे का गवाह बना, जहां DM साहब का जज्बा और खिलाड़ियों के साथ उनका तालमेल देखने लायक था। यकीन मानिए, दर्शकों के लिए यह किसी बड़ी प्रेरणा से कम नहीं था।
क्या था मैच का रोमांच?
फाइनल मुकाबला एससीसी शीतलपुर और एनसी बर्दा के बीच हुआ। मुकाबला इतना कड़ा था कि दोनों टीमें मानो अपनी जान लगाकर खेल रही थीं।
- पहला और दूसरा हाफ—दोनों ही चरणों में कोई टीम गोल नहीं कर सकी। गेंद लगातार मिडफील्ड में जूझती रही।
- आखिरकार, खेल का नतीजा तय करने के लिए पेनल्टी शूटआउट का सहारा लेना पड़ा।
- पेनल्टी में शीतलपुर टीम ने 3–0 से बाजी मार ली।
लेकिन, मैच का सबसे यादगार पल वो था जब DM निखिल धनराज, अपनी 7 नंबर की जर्सी में मैदान पर उतरे और अंतिम निर्णायक गोल किया। इस गोल के होते ही पूरे स्टेडियम में ऐसा जोश भरा उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी, जो मुंगेर के लोग शायद ही कभी भूल पाएं!
चोट लगने पर भी नहीं डिगे DM साहब
सोचिए, प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति खेल के लिए कितना समर्पित होगा! मैच के दौरान जिलाधिकारी को मामूली चोट भी लगी, लेकिन उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। उनका यह अटूट जज्बा उनकी टीम के लिए और मैदान में बैठे युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश बन गया।
जीत के बाद उन्होंने युवाओं से अपने दिल की बात कही—
“हार और जीत तो खेल का एक छोटा-सा हिस्सा है। जीत आपको बताती है कि आप और बेहतर कैसे हो सकते हैं, जबकि हार आपको आपकी कमजोरियां दिखाती है। मुंगेर में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहाँ के खिलाड़ी भविष्य में देश के लिए और ओलंपिक में भी खेल सकते हैं।”
DM बने रजिस्टर्ड खिलाड़ी!
मुंगेर फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव भावेश कुमार ने इस बात की पुष्टि की कि—
“यह लीग बीते एक माह से चल रही थी। सबसे खास बात यह है कि DM साहब बाकायदा रजिस्टर्ड खिलाड़ी बनकर शीतलपुर टीम से पूरे टूर्नामेंट में खेले और टीम को फाइनल तक पहुंचाया। ऐसा पहली बार हुआ है!”
डीएम साहब ने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी पहल को दोहराते हुए यह भी कहा कि ब्लॉक स्तर से लेकर प्रमंडल स्तर तक खेल के मैदान बनाए जा रहे हैं। उनका मानना है कि मुंगेर के खिलाड़ियों में ऐसा टैलेंट है कि वे इंटरनेशनल स्तर तक खेल सकते हैं।
मुंगेर के लिए ‘स्वर्णिम पल’
इतिहास में यह पहला अवसर है जब मुंगेर में किसी जिलाधिकारी ने खुद किसी टीम का हिस्सा बनकर फाइनल मैच खेला और टीम को जीत दिलाई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया सुनकर पता चला कि इस घटना ने युवाओं का मनोबल और आत्मविश्वास दोगुना कर दिया है। उनका कहना है कि DM का मैदान पर उतरना सिर्फ प्रेरणा नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि खेल और अनुशासन, प्रशासन का एक अहम हिस्सा है।
जिलाधिकारी ने अपने भाषण में भी कहा: “अगर आप एक अच्छे स्पोर्ट्समैन हैं तो आप एक अच्छे और अनुशासित व्यक्ति भी होंगे।”
इस ऐतिहासिक जीत ने मुंगेर के फुटबॉल इतिहास में एक नया ‘स्वर्णिम पल’ जोड़ दिया है। यह सिर्फ खेल नहीं था, यह अनुशासन, टीम भावना और निरंतर आगे बढ़ने के जज्बे की एक शानदार कहानी थी।










