मुंगेर (बिहार)। राजनीति के केंद्र में एक बार फिर बयानबाजी आ गई है। मुंगेर व्यवहार न्यायालय (सीजीएम कोर्ट) में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी और अन्य नेताओं के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज हुआ है।
परिवाद दर्ज कराने वाले भाजपा नेता मणिशंकर भोलू, जो मुंगेर नगर मंडल भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं, ने दावा किया है कि दरभंगा में आयोजित वोटर अधिकार यात्रा के दौरान मंच से ऐसी टिप्पणी की गई थी, जिसे वह प्रधानमंत्री की मां का अपमान मानते हैं।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा नेता मणिशंकर भोलू ने मुंगेर सीजीएम कोर्ट में परिवाद दायर करते हुए आरोप लगाया कि दरभंगा की धरती से राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द बोले गए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति दोनों का अपमान है।
भोलू ने अदालत में दर्ज परिवाद संख्या 897 सी/25 का हवाला देते हुए बताया कि इस शिकायत में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और करीब 100 अज्ञात कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत का आधार केवल व्यक्तिगत आरोप नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में प्रकाशित समाचार को देखकर यह निर्णय लिया गया कि मामला अदालत में ले जाया जाए।
भाजपा नेता का बयान
परिवाद दर्ज करने के बाद मीडिया से बातचीत में मणिशंकर भोलू ने कहा:
“माननीय राहुल जी द्वारा दरभंगा की धरती पर आयोजित वोट अधिकार रैली में प्रधानमंत्री जी की माता जी को लेकर अपशब्द कहे गए। यह अत्यंत दुखद और अपमानजनक है। इस कारण मैंने आज मुंगेर सीजीएम कोर्ट में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और अन्य के खिलाफ परिवाद दायर किया है। अदालत से न्याय की उम्मीद है।”
विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर अब तक विपक्षी नेताओं की कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस, राजद और वीआईपी पार्टी की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अदालत की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही विपक्ष की तरफ से प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
दरभंगा में हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस, राजद और वीआईपी पार्टी के कई नेता शामिल हुए थे। महागठबंधन ने इसे बिहार में मतदाता जागरूकता अभियान के रूप में प्रस्तुत किया। इसी दौरान मंच से दिए गए बयानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन मोदी का पिछले वर्ष निधन हो गया था। भाजपा ने इस बयान को व्यक्तिगत हमले की श्रेणी में बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
कानूनी पहलू
परिवाद संख्या 897 सी/25 मुंगेर व्यवहार न्यायालय में दर्ज हुई है। अब यह मामला अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगा कि आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत पहले यह देखेगी कि क्या कथित टिप्पणी का प्रमाण पर्याप्त है और क्या यह भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के अंतर्गत आता है, जिनमें मानहानि या आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला बन सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित शिकायत
भाजपा नेता ने साफ किया कि उन्होंने यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स को देखकर दर्ज किया है। उनका कहना है कि जब विभिन्न माध्यमों में यह समाचार सामने आया, तब उन्होंने इसे गंभीर मानते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अदालत अब यह भी देखेगी कि मीडिया रिपोर्ट्स को बतौर साक्ष्य किस हद तक मान्य किया जा सकता है।
बिहार की राजनीति में नए विवाद की आहट
बिहार की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला अदालत तक पहुंच गया है। चुनावी माहौल और गठबंधन राजनीति के बीच इस तरह के विवाद राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। भाजपा इसे जनता के बीच मुद्दा बना सकती है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताकर पलटवार कर सकता है।
निष्कर्ष
फिलहाल मामला अदालत में है और सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस तरह की कार्रवाई होगी। लेकिन एक बात साफ है कि प्रधानमंत्री की मां को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर राजनीति तेज हो गई है।
भाजपा इसे अपमानजनक करार दे रही है, जबकि विपक्ष की चुप्पी से अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।










