भागलपुर। जिले के बायपास थाना क्षेत्र से इस वक्त एक दहला देने वाली खबर सामने आई है। खुटाहा गांव में सोमवार की सुबह एक तुच्छ आपसी विवाद ने अचानक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पहले बेरहमी से मारपीट हुई और फिर ताबड़तोड़ गोलीबारी, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया। घायल को अविलंब जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (JLNMCH) में भर्ती कराया गया है, जहां मौत और जिंदगी के बीच उनका इलाज जारी है।
इस खौफनाक वारदात ने न सिर्फ पूरे गांव को दहशत के साए में धकेल दिया है, बल्कि एक बार फिर यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर क्यों हमारे समाज में छोटे-छोटे मनमुटाव भी इतनी जल्दी खून-खराबे में बदल जाते हैं?
आखिर माजरा क्या है?
सूत्रों के मुताबिक, खुटाहा गांव के मीरन यादव रोज की तरह सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे दूध बेचने के लिए जा रहे थे। रास्ते में ही गांव के कुछ लोगों ने उन्हें घेर कर उन पर अचानक हमला बोल दिया।
आरोप है कि सुजीत यादव, अंजीत यादव, रंजीत यादव और देव कुमार यादव नाम के चार आरोपियों ने मीरन यादव की पहले जमकर पिटाई की। उनका मन यहीं नहीं भरा, तो उन्होंने जान लेने की नियत से गोली भी चला दी। गनीमत रही कि गोली उन्हें सीधे नहीं लगी, लेकिन लोहे की रॉड और डंडों के हमले में वे बुरी तरह से जख्मी हो गए।
परिजनों ने वक्त गंवाए बिना उन्हें भागलपुर के JLNMCH पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है। फिलहाल, उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
विवाद की जड़: बेटी की मारपीट का पुराना मामला
घायल मीरन यादव ने अस्पताल के बिस्तर से मीडिया से बातचीत में इस हमले की असली वजह बताई। उन्होंने बताया कि इस हिंसक वारदात की बुनियाद कुछ महीने पहले ही पड़ गई थी।
उनके अनुसार, कुछ माह पूर्व उनकी बेटी के साथ मारपीट हुई थी, जिसके संबंध में उन्होंने हिम्मत करके थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई थी। तभी से आरोपी लगातार उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे।
मीरन यादव का साफ आरोप है कि आरोपी उन्हें आए दिन डराते-धमकाते थे कि अगर उन्होंने केस वापस नहीं लिया तो इसका गंभीर अंजाम भुगतना पड़ेगा। सोमवार को उसी पुरानी रंजिश का परिणाम इस जानलेवा हमले के रूप में सामने आया।
घटनास्थल का हाल
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह हमला जोगनी स्थान के सामने स्थित एक बगीचे के करीब हुआ। मीरन यादव जैसे ही अपनी गाड़ी से दूध लेकर आगे बढ़े, चारों आरोपियों ने उन्हें बांहों में ले लिया।
सबसे पहले हवा में गोली चली, जिससे पूरे गांव में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। इसके तुरंत बाद लोहे की रॉड और मोटे डंडों से मीरन यादव पर पिल पड़े। उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे मौके पर ही गिरकर बेहोश हो गए। गांववालों का कहना है कि यह घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को भी बीच-बचाव करने का साहस नहीं हुआ।
पुलिस की तत्परता और कार्रवाई
इस गंभीर घटना की जानकारी मिलते ही बायपास थाना पुलिस की टीम फौरन मौके पर पहुंची और बारीकी से छानबीन शुरू कर दी।
थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि पीड़ित पक्ष की तरफ से लिखित शिकायत मिल चुकी है और तत्काल मामला दर्ज किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच के आधार पर बताया है कि यह मामला पूरी तरह से पुराने विवाद और केस वापस लेने के दबाव से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।
गांव में भारी तनाव: सुरक्षा बल तैनात
इस हमले के बाद खुटाहा गांव और आस-पास के इलाकों में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस ने गांव में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि आरोपियों को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
सवालिया निशान: कब रुकेगा यह सिलसिला?
यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने पर भी एक गहरी चोट है। भागलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां छोटी सी बात पर भी लोग हाथों में हथियार उठा लेते हैं।
समाजशास्त्रियों की राय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी मेलजोल की कमी, वर्चस्व की लड़ाई और न्यायिक प्रक्रिया में देरी जैसी चीजें ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती हैं। जब न्याय की आस कमजोर पड़ जाती है, तो लोग बाहुबल का सहारा लेने लगते हैं।
पुलिस और प्रशासन के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है कि वे न केवल आरोपियों को सलाखों के पीछे डालें, बल्कि मीरन यादव जैसे पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाएं कि कानून का राज अभी भी कायम है।
क्या आपको लगता है कि पुलिस को ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार को तुरंत सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए, खासकर जब उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा हो?








