पटना। बिहार की सियासत इन दिनों वोट अधिकार यात्रा को लेकर गर्माई हुई है। विपक्ष की इस यात्रा ने जहां एनडीए और बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को बिहार पहुंचकर इस यात्रा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
पटना एयरपोर्ट पर उतरते ही अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत की और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब बदलाव के मूड में है और इस बार बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखाना तय है।
वोट अधिकार यात्रा में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
वोट अधिकार यात्रा में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। इस यात्रा का मकसद जनता को जागरूक करना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर दबाव बनाना बताया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने इस यात्रा को लेकर कहा,
“मैं इस मौके पर वोट अधिकार यात्रा में शामिल होने आया हूं। मैं बधाई देना चाहता हूं बिहार की जनता को कि उन्होंने इस अभियान को समर्थन दिया है। यह यात्रा सिर्फ बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति को नई दिशा देने का काम करेगी।”
बीजेपी पर “इस्तेमाल करने वाली पार्टी” का आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी लोगों को इस्तेमाल करती है और फिर बर्बाद कर देती है।
“भारतीय जनता पार्टी इस्तेमाली पार्टी है। जो लोगों का इस्तेमाल कर बर्बाद कर देती है। लेकिन अब जनता सब समझ रही है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी।”
उन्होंने कहा कि अवध क्षेत्र से बीजेपी को बाहर किया जा चुका है और अब बिहार के मगध क्षेत्र से भी इसे हटाना जनता की जिम्मेदारी है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
सपा सुप्रीमो ने चुनाव आयोग को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आयोग अब “जुगाड़ आयोग” बन चुका है।
“चुनाव आयोग की जिम्मेदारी थी कि निष्पक्ष चुनाव कराए, लेकिन यह बीजेपी की मदद करने वाला संगठन बन गया है। यह जुगाड़ आयोग है, जो लोकतंत्र की आत्मा के साथ समझौता कर रहा है।”
अखिलेश ने यह भी कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इस यात्रा के जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाई है और अब जनता ही असली एसआईआर दर्ज करेगी।
बिहार बनाम यूपी: नौकरी और पलायन का मुद्दा
अखिलेश यादव ने यूपी और बिहार की तुलना करते हुए योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूपी में हालात लगातार खराब हो रहे हैं और सरकार जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
“यूपी के संबल में जो घटना हुई, वो बताती है कि सरकार लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने में विफल है। इसके मुकाबले तेजस्वी यादव ने बिहार में लाखों नौकरियां दी हैं और युवाओं को पलायन से बचाने का प्रयास किया है। यही भरोसा जनता को विपक्ष के साथ खड़ा कर रहा है।”
पीएम मोदी पर अप्रत्यक्ष हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां पर की गई टिप्पणी को लेकर भी सियासत गरमाई हुई है। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नेताओं को गुस्सा अमेरिका से होना चाहिए, जिसने भारत पर टैरिफ लगाया है।
“भाजपा नेताओं को अमेरिका से सवाल करना चाहिए, जिसने भारत पर टैरिफ लगाया। लेकिन इन मुद्दों पर ये चुप रहते हैं। असल में भाजपा हर उस व्यक्ति का अपमान करती है, जो उनके खिलाफ आवाज उठाता है। वोट के अधिकार को छीनना भी जनता का अपमान है।”
विपक्ष की एकजुटता और बिहार की भूमिका
बिहार की राजनीति हमेशा से राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण रही है। आजादी के आंदोलन से लेकर आपातकाल और मंडल राजनीति तक, बिहार ने भारतीय राजनीति को दिशा दी है। अब वोट अधिकार यात्रा के जरिए विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि लोकतंत्र की रक्षा सिर्फ संसद में भाषणों से नहीं, बल्कि जनता को साथ लेकर सड़क पर उतरने से होगी।
अखिलेश यादव का बिहार दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि इस बार बिहार की आवाज पूरे देश में गूंजेगी और बीजेपी को बाहर करना जनता का संकल्प बन चुका है।
क्या बदल पाएगी यह यात्रा राजनीतिक समीकरण?
विश्लेषकों की मानें तो विपक्ष की यह यात्रा आगामी लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा संदेश है। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अब अखिलेश यादव की एकजुटता से भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विपक्षी मोर्चे की तस्वीर उभर रही है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह यात्रा कितनी असरदार साबित होगी। भाजपा अभी भी बिहार और यूपी दोनों राज्यों में संगठनात्मक स्तर पर मजबूत है और उसके पास केंद्र की सत्ता का भी लाभ है। लेकिन विपक्ष के नेताओं की संयुक्त मौजूदगी निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं में जोश भर रही है।
जनता का मूड और 2025 का चुनावी समीकरण
बिहार की जनता के बीच इस समय रोजगार, शिक्षा, पलायन और महंगाई सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं। वहीं केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी नाराजगी दिखाई देती है।
अगर विपक्ष इन मुद्दों को एकजुट होकर सामने रखता है, तो इसका असर निश्चित रूप से 2025 के विधानसभा और 2026 के लोकसभा चुनावों पर पड़ सकता है। लेकिन चुनावी राजनीति में आंकड़े और जमीनी समीकरण अक्सर अंतिम समय में ही स्पष्ट होते हैं।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव का बिहार दौरा और उनका वोट अधिकार यात्रा में शामिल होना विपक्ष की एकजुटता की ओर इशारा करता है। उन्होंने भाजपा पर “इस्तेमाल करने वाली पार्टी” का आरोप लगाकर सीधे जनता के बीच संदेश देने की कोशिश की है।
लोकतंत्र में जनता का अधिकार और वोट की ताकत ही सबसे बड़ा हथियार है। बिहार की राजनीति इस बार किस दिशा में जाती है, यह आने वाला वक्त तय करेगा। लेकिन इतना तय है कि वोट अधिकार यात्रा ने चुनावी माहौल को और भी गर्म कर दिया है।










