मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले के चांदमारी स्थित जीवन पब्लिक स्कूल में आयोजित वार्षिक परीक्षा परिणाम समारोह इस बार खुशियों के साथ-साथ गर्व का प्रतीक बन गया। स्कूल के नन्हे वैज्ञानिकों ने अपनी तकनीकी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। कार्यक्रम के दौरान उन छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिनके प्रोजेक्ट का चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT गुवाहाटी के लिए हुआ है।
क्या है यह खास ‘फायर अलार्म सिस्टम’ प्रोजेक्ट?
कक्षा आठवीं की छात्रा आदिश्री श्रीवास्तव, सुमैया खातून और जीनत परवीन ने मिलकर एक अत्याधुनिक ‘फायर अलार्म सिस्टम’ तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट आर्डुइनो (Arduino) माइक्रोकंट्रोलर तकनीक पर आधारित है।
- कैसे करता है काम: इस सिस्टम में लगे सेंसर आग की आहट मिलते ही उसे तुरंत पहचान लेते हैं।
- विशेषता: आग का पता चलते ही यह सिस्टम न केवल अलार्म बजाता है, बल्कि ऑटोमैटिक तरीके से पानी का छिड़काव शुरू कर आग पर काबू पाने की कोशिश भी करता है।
पूरे उत्तर बिहार से एकमात्र चयन
विद्यालय के लिए सबसे बड़े गौरव की बात यह है कि पूरे उत्तर बिहार से केवल जीवन पब्लिक स्कूल के इन छात्रों के प्रोजेक्ट को ही IIT गुवाहाटी के लिए चुना गया है। इस सफलता के पीछे प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तनुजा टाक का मार्गदर्शन और विद्यालय के प्राचार्य मुकेश कुमार का तकनीकी सहयोग रहा, जिन्होंने बच्चों को कोडिंग और सेंसर तकनीक की बारीकियां सिखाईं।
आधुनिक शिक्षा और नवाचार पर जोर
समारोह के मुख्य अतिथि और विद्यालय के संस्थापक महेश श्रीवास्तव एवं उमरेश देवी ने बच्चों को पुरस्कृत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। वहीं, विद्यालय के उपाध्यक्ष मनोज सर और प्रबंधन समिति के सदस्यों (मनोज रंजन, जीवन प्रकाश एवं स्वर्णिम श्रीवास्तव) ने कहा कि आज के दौर में किताबी ज्ञान के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा बहुत जरूरी है।
मैनेजमेंट का संदेश: > “हमारा लक्ष्य बच्चों को ऐसी सुविधाएं देना है जिससे वे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बिहार का नाम पूरे देश में रोशन कर सकें।”
अभिभावकों में दिखा भारी उत्साह
रिजल्ट के साथ-साथ बच्चों की इस बड़ी उपलब्धि को देख अभिभावक भी काफी गदगद नजर आए। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। यह आयोजन न केवल परीक्षा के परिणामों का उत्सव था, बल्कि बच्चों की रचनात्मकता और उनकी वैज्ञानिक सोच की एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया।
ब्यूरो रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।






