बिहार की सियासत में आजकल जो गरमाहट है, वह किसी चुनावी रैली की नहीं, बल्कि एक धाँसू बयान की पैदा की हुई है। चुनावी रणनीतिकार से फायरब्रांड नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू (JDU) के लिए एक ऐसी चुनौती की डोरी फेंक दी है कि पूरे राजनीतिक अखाड़े में उबाल आ गया है। किशनगंज की सभा में PK ने ऐलान कर दिया कि अगर जेडीयू अगले विधानसभा चुनाव में 25 से ज़्यादा सीटें जीत गई, तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
यह बयान महज़ एक घोषणा नहीं है, बल्कि नीतीश कुमार के दशकों के राजनीतिक अनुभव और उनकी वर्तमान साख पर सीधा हमला है—एक ऐसा हमला, जिसकी गूँज दूर तक जाएगी।
PK की ‘संन्यास’ वाली चाल: क्यों ये इतना घातक है?
प्रशांत किशोर को देश का हर बड़ा नेता जानता है। आंध्र से बंगाल तक, उनकी चुनावी तरकीबों ने पार्टियों की किस्मत पलटी है। लेकिन बिहार से उनका जुड़ाव पेट्रोल और आग जैसा है। कभी नीतीश के सबसे करीबी रहे, फिर मतभेद हुए और रास्ता अलग हो गया। अब जब वह “जन सुराज” की अपनी दुकान खोलकर बैठे हैं, तो उनका यह दाँव प्रोफेशनल रणनीति से कहीं ज़्यादा व्यक्तिगत चुनौती जैसा लगता है।
यह ऐलान दिखाता है कि PK अब पर्दे के पीछे के मास्टरमाइंड नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर आकर खेलने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।
किशनगंज का ‘खुला चैलेंज’: 25 सीटों की लक्ष्मण रेखा
किशनगंज के अंजुमन इस्लामिया प्रांगण में PK ने सिर्फ बोल बच्चन नहीं दिया, बल्कि सीधे युद्ध का ऐलान कर दिया। उनकी भाषा में एक अजीब-सी आक्रामकता थी जो आम तौर पर चुनावी रणनीतिकारों में नहीं दिखती।
उन्होंने कहा:
“सुन लो! अगर नीतीश कुमार की पार्टी 25 सीटों का जादुई आँकड़ा पार कर गई, तो मैं हाथ जोड़कर, हमेशा के लिए राजनीति से छुट्टी ले लूँगा।”
”बंगाल में बीजेपी की हवा बनी थी, फिर भी उन्हें 100 सीटें नसीब नहीं हुईं। उसी तरह, बिहार में जेडीयू किसी हाल में 25 के पार नहीं जा पाएगी।”
यह बयान नीतीश कुमार के लिए एक बड़ी फ़ज़ीहत है। अगर JDU 25 से नीचे सिमटती है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि बिहार ने नीतीश को अस्वीकार कर दिया है।
नीतीश और PK की सियासी रस्साकशी
बिहार की पॉलिटिक्स में नीतीश कुमार को ‘पलटूराम’ कहा जाता है, लेकिन उनका अनुभव कोई नहीं नकार सकता। हाँ, यह सच है कि पिछले कुछ सालों में उनकी राजनीतिक चमक फीकी हुई है।
- जेडीयू का सिरदर्द: PK का 25 सीटों वाला दावा सीधे तौर पर JDU की जमीनी हकीकत पर चोट करता है। अगर यह सच हो गया, तो नीतीश कुमार का करियर ग्राफ ज़मीन पर आ गिरेगा।
- PK का ‘करो या मरो’ दाँव: अगर JDU 25 से ऊपर चली गई, तो PK को अपनी बड़ी-बड़ी बातें निगलनी पड़ेंगी और राजनीति छोड़नी पड़ेगी। यह उनकी विश्वसनीयता के लिए एक बहुत बड़ा जुआ है।
जब विरोधियों ने घेरा तो PK ने दिया ‘कुत्ते’ वाला जवाब
PK अब एक टिपिकल राजनेता की तरह व्यवहार कर रहे हैं—हमले का जवाब दुगनी ताक़त से दे रहे हैं।
JDU के नेता मनीष वर्मा ने जब PK पर शराब माफियाओं से साँठगाँठ का आरोप लगाया, तो PK का जवाब देखिए: “ऐसे छिछोरे लोगों की बातें सुनना वैसा ही है जैसे सड़क पर किसी कुत्ते को देखकर ध्यान भटक जाए।”
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल के लीगल नोटिस पर उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है… ऐसे नेताओं के 100 नोटिस भी आ जाएँ तो भी मैं सच बोलना नहीं छोड़ूँगा।”
यह भाषा बताती है कि PK अब सिर्फ़ फैक्ट्स और फिगर्स की बात नहीं कर रहे, बल्कि भावनात्मक और आक्रामक राजनीति कर रहे हैं।
धार्मिक दाँव: किशनगंज में दिखी नई रणनीति
PK सिर्फ़ रणनीति पर नहीं टिके हैं, उन्होंने किशनगंज की सभा में धार्मिक प्रतीकों का भी जमकर इस्तेमाल किया।
- सभा में धर्म और पैगंबर का हवाला दिया गया।
- लोगों को टोपी बाँटी गई और नाश्ते का इंतजाम किया गया।
यह कदम साफ़ इशारा करता है कि PK, जातीय समीकरणों के साथ-साथ अल्पसंख्यक वोटों को साधने की भी कोशिश कर रहे हैं। वे जानते हैं कि बिहार की चुनावी लड़ाई जमीनी समीकरणों से जीती जाती है।
निष्कर्ष: बिहार की राजनीति में अब PK ही असली ‘गेम चेंजर’
बिहार की राजनीति हमेशा से अनिश्चित रही है, और PK का यह बयान एक और बड़ा झटका है। यह सीधे तौर पर नीतीश कुमार की विरासत पर सवाल खड़ा करता है।
अंतिम बात: यह ‘संन्यास’ का दाँव PK की सबसे बड़ी चाल हो सकता है। या तो वह बिहार की राजनीति को एक नया आयाम देंगे और खुद को स्थापित करेंगे, या फिर अपने ही दिए बयान की वजह से पॉलिटिकल लाइमलाइट से बाहर हो जाएँगे। लेकिन एक बात पक्की है: JDU की 25 सीटों वाला टारगेट अब बिहार चुनाव का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुका है!
आपको क्या लगता है: क्या PK का यह ‘संन्यास’ वाला जुआ उन्हें बिहार की राजनीति में हीरो बनाएगा, या यह महज़ एक सस्ती पब्लिसिटी स्टंट है?










