बिहार सरकार ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाते हुए “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की हर परिवार की कम-से-कम एक महिला को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का दावा है कि इस पहल से न केवल महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी बल्कि राज्य के भीतर ही रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
यह निर्णय उस दौर में लिया गया है जब बिहार में बेरोजगारी और पलायन की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है। ऐसे में महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना सरकार की एक रणनीतिक और दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का मकसद केवल आर्थिक सहायता देना भर नहीं है, बल्कि इसे महिलाओं की आत्मनिर्भरता और राज्य की समग्र प्रगति से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि हर परिवार की एक महिला अपने पसंद के रोजगार में हाथ आजमाए और इससे परिवार की आय में वृद्धि हो।
इस योजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा –
“हमने 2005 से ही महिला सशक्तीकरण के लिए लगातार काम किया है। अब महिलाएं बिहार की प्रगति में अपनी मेहनत से योगदान दे रही हैं। इस योजना से उन्हें और मजबूती मिलेगी तथा राज्य के अंदर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।”
योजना की प्रमुख विशेषताएं
- प्रारंभिक आर्थिक सहायता – राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
- आवेदन प्रक्रिया – इच्छुक महिलाओं से आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी गई है। आवश्यकतानुसार नगर विकास एवं आवास विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।
- सितंबर 2025 से राशि का हस्तांतरण – सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना के अंतर्गत सितंबर 2025 से ही महिलाओं के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर होना शुरू हो जाएगी।
- अतिरिक्त सहायता – महिलाओं द्वारा रोजगार शुरू करने के छह माह बाद मूल्यांकन किया जाएगा। यदि उन्हें अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होगी, तो 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
- बिक्री के लिए हाट-बाजार का निर्माण – महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए गांवों से लेकर शहरों तक विशेष हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे। इससे उन्हें सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का मौका मिलेगा और मध्यस्थों पर निर्भरता घटेगी।
महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का मौका
इस योजना के जरिये सरकार चाहती है कि महिलाएं अब केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित न रहें बल्कि आर्थिक रूप से भी सक्रिय भागीदारी निभाएं। चाहे वह कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय, सेवा क्षेत्र या फिर स्टार्टअप्स क्यों न हों, महिलाएं अपने पसंद के रोजगार का चुनाव कर सकती हैं।
गौरतलब है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पहले से ही स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से सिलाई, बुनाई, डेयरी और खेती जैसे कार्यों से जुड़ी हैं। अब मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना उन्हें बड़े स्तर पर संसाधन उपलब्ध कराएगी।
राज्य की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि योजना का सही ढंग से क्रियान्वयन हुआ तो इसके कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं –
- पलायन में कमी – रोजगार के अवसर राज्य के भीतर मिलने से मजदूरी या काम की तलाश में बिहार से बाहर जाने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है।
- स्थानीय बाजार का विकास – हाट-बाजारों के जरिये ग्रामीण और शहरी स्तर पर नए बाजार तैयार होंगे। इससे न केवल महिलाओं को बल्कि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा।
- राज्य की जीडीपी में योगदान – जब बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार से जुड़ेंगी तो राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
- सामाजिक बदलाव – महिलाओं की आय बढ़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं –
- पारदर्शिता और निगरानी – यह सुनिश्चित करना कि राशि वास्तव में लाभार्थियों तक पहुंचे और इसका उपयोग रोजगार शुरू करने में हो, एक बड़ी चुनौती होगी।
- प्रशिक्षण और मार्गदर्शन – केवल आर्थिक सहायता देने से ही रोजगार स्थायी नहीं हो पाएंगे। महिलाओं को व्यवसाय की बारीकियों और बाजार तक पहुंचने का प्रशिक्षण भी देना होगा।
- बाजार प्रतिस्पर्धा – हाट-बाजार के माध्यम से उत्पाद बेचना आसान होगा, लेकिन उन्हें टिकाऊ बनाने के लिए गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा पर भी ध्यान देना होगा।
- ग्रामीण स्तर पर जागरूकता – योजना का लाभ तभी होगा जब गांव-गांव तक इसकी जानकारी पहुंचे और महिलाएं आवेदन करें।
जमीनी हकीकत: महिलाएं क्या कहती हैं?
पटना जिले की रहने वाली अनीता देवी, जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, कहती हैं –
“अगर हमें 10 हजार रुपये मिलेंगे तो हम अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन जरूरत है कि हमें सही समय पर प्रशिक्षण और बाजार मिले।”
वहीं, गया जिले की रेखा कुमारी का कहना है –
“सरकार का यह कदम अच्छा है। हमें उम्मीद है कि बैंक खाते में सीधे पैसे आने से भ्रष्टाचार नहीं होगा और महिलाएं खुद अपना रोजगार शुरू कर पाएंगी।”
सरकार की तैयारियां
ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है ताकि महिलाएं आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकें। वहीं, पंचायत स्तर पर सहायक टीमें बनाई जाएंगी जो लाभार्थियों की पहचान और आवेदन प्रक्रिया में मदद करेंगी।
इसके अलावा, सरकार की योजना है कि राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए जो हर छह महीने में योजना की समीक्षा करेगी और जमीनी स्तर से रिपोर्ट लेगी।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्री डॉ. मनीष कुमार का मानना है कि –
“यह योजना महिलाओं को रोजगार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हो सकता है। लेकिन ध्यान रखना होगा कि महिलाएं केवल पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें आधुनिक और तकनीक आधारित कामों से भी जोड़ा जाए।”
सामाजिक कार्यकर्ता नीना झा कहती हैं –
“इस योजना से समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी। अगर हाट-बाजार सही ढंग से विकसित किए गए तो महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।”
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार की उन योजनाओं में शामिल हो गई है जो महिला सशक्तीकरण को नई दिशा दे सकती हैं। यह सिर्फ आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है।
यदि सरकार पारदर्शिता, प्रशिक्षण, बाजार उपलब्धता और निगरानी पर ध्यान दे, तो आने वाले वर्षों में यह योजना न केवल महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।










