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जितिया कब है 2025? पूरी जानकारी तिथि, महत्व, पूजा विधि और परंपरा

On: September 6, 2025 8:22 PM
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जितिया कब है 2025? पूरी जानकारी तिथि, महत्व, पूजा विधि और परंपरा
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भारत में व्रत और त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परिवार और समाज को जोड़ने वाले गहरे भावनात्मक धागे भी हैं। इन्हीं व्रतों में एक खास और कठिन व्रत है जितिया व्रत या जीवित पुत्रिका व्रत। यह व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य के लिए करती हैं।

हर साल लाखों महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और संतान की कुशलता की कामना करती हैं। यही कारण है कि लोग अक्सर जानना चाहते हैं – “जितिया कब है?”

तो आइए विस्तार से जानते हैं कि साल 2025 में जितिया कब है, इसकी तिथियां, महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू क्या हैं।


जितिया व्रत कब है 2025 में?

हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है। इसे जीवित पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है।

  • नहाए-खाए की तिथि – 13 सितंबर 2025, शनिवार
  • खुर जीतिया (व्रत का मुख्य दिन) – 14 सितंबर 2025, रविवार
  • पारण की तिथि – 15 सितंबर 2025, सोमवार

अष्टमी तिथि का समय

  • प्रारंभ – 14 सितंबर 2025, सुबह 5:04 बजे
  • समाप्ति – 15 सितंबर 2025, सुबह 3:06 बजे

इस तरह साल 2025 में जितिया व्रत 14 सितंबर (रविवार) को मनाया जाएगा।


जितिया व्रत का महत्व

जितिया केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मातृत्व की शक्ति और संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

  • यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है।
  • इसे करने वाली माताएं निर्जला उपवास रखती हैं, यानी दिनभर पानी की एक बूंद तक नहीं पीतीं।
  • मान्यता है कि इस व्रत से संतान की उम्र लंबी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • लोककथाओं के अनुसार, इस व्रत का संबंध गंधर्वराज जिमूतवाहन की कथा से है, जिन्होंने अपने त्याग और बलिदान से नागवंश की रक्षा की थी।

जितिया व्रत से जुड़ी परंपराएं

1. नहाए-खाए (पहला दिन)

  • इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करती हैं और सात्विक भोजन करती हैं।
  • भोजन के बाद दिनभर उपवास रखती हैं।
  • यह दिन व्रत की तैयारी के रूप में माना जाता है।

2. खुर जीतिया (दूसरा दिन)

  • यही व्रत का सबसे कठिन दिन होता है।
  • महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं।
  • कुश से गंधर्वराज जिमूतवाहन की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है।
  • चल और सियार की गोबर से मूर्ति बनाकर विशेष पूजा करने की परंपरा भी है।
  • महिलाएं लाल और पीले धागे को गले में धारण करती हैं।

3. पारण (तीसरा दिन)

  • अष्टमी समाप्त होने के बाद नवमी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है।
  • महिलाएं सुबह स्नान करके पूजा करती हैं और फिर अन्न-जल ग्रहण करती हैं।

धार्मिक मान्यता

  • माना जाता है कि यदि कोई महिला एक बार जितिया व्रत करती है, तो उसे जीवनभर हर साल यह व्रत करना आवश्यक होता है।
  • बीच में व्रत छोड़ना अशुभ माना जाता है।
  • व्रत के दिन महिलाएं विशेष गीत गाती हैं, जिन्हें जितिया गीत कहा जाता है।
  • यह गीत मातृत्व, जिमूतवाहन की कथा और संतान के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।

जितिया व्रत की कथा

लोककथा के अनुसार, गंधर्वराज जिमूतवाहन एक धर्मनिष्ठ और परोपकारी व्यक्ति थे। उन्होंने देखा कि हर साल नागवंश से एक युवक को बलि स्वरूप गरुड़ को दिया जाता है।

जिमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए स्वयं को बलि के रूप में प्रस्तुत कर दिया। उनके त्याग और बलिदान से नागवंश बच गया और उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिला।

इसी कथा की स्मृति में माताएं संतान की रक्षा के लिए जितिया व्रत करती हैं।


जितिया का सामाजिक महत्व

जितिया व्रत सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह समाज में परिवार और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक भी है।

  • माताएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं, जिससे सामूहिकता और सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है।
  • लोकगीत, कथाएं और सामूहिक पूजा से सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है।
  • यह व्रत नारी शक्ति और मातृत्व के त्याग का संदेश देता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जितिया

आधुनिक समय में उपवास और व्रत को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं देखा जाता, बल्कि इसके स्वास्थ्य संबंधी फायदे भी माने जाते हैं।

  • डिटॉक्सिफिकेशन – उपवास से शरीर की सफाई होती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
  • मानसिक एकाग्रता – कठिन व्रत से आत्मबल और धैर्य की वृद्धि होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा – पूजा और धार्मिक वातावरण मानसिक शांति और सकारात्मकता लाता है।

हालांकि, कमजोर स्वास्थ्य, गर्भावस्था या गंभीर रोग की स्थिति में इस व्रत को पूरी तरह निर्जला करने की जगह प्रतीकात्मक रूप से करना उचित है।


2025 में जितिया व्रत खास क्यों?

साल 2025 में जितिया व्रत रविवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यता है कि रविवार के दिन व्रत करने से विशेष पुण्य और लाभ मिलता है।
इस दिन सूर्य देव की भी पूजा का महत्व है, और चूंकि सूर्य संतान और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है, इसलिए यह व्रत और भी अधिक फलदायी माना जा रहा है।


जितिया कब है? – आने वाले वर्षों की झलक

कई लोग केवल 2025 ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी “जितिया कब है” जानना चाहते हैं।

  • 2025 – 14 सितंबर, रविवार
  • 2026 – 3 अक्टूबर, शनिवार
  • 2027 – 22 सितंबर, बुधवार

(यह तिथियां पंचांग के आधार पर हैं और स्थानानुसार थोड़ा अंतर संभव है।)


सावधानियां और सुझाव

  • यह व्रत बहुत कठिन है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
  • निर्जला उपवास कमजोर स्वास्थ्य वाली महिलाओं के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।
  • पूजा में सात्विकता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • व्रत के दौरान मानसिक शांति और सकारात्मक सोच बनाए रखना जरूरी है।

निष्कर्ष

तो अब आपके सवाल “जितिया कब है 2025 में?” का जवाब साफ है – यह व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा।

यह व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह मातृत्व की शक्ति, संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम और परिवार की एकता का उत्सव है। जितिया व्रत भारतीय समाज की उस गहरी परंपरा का हिस्सा है जिसमें मां अपने बच्चों की रक्षा और लंबी उम्र के लिए हर कठिनाई सहन करने को तैयार रहती है।

साल 2025 का जितिया व्रत विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह रविवार को पड़ रहा है और यह दिन सूर्य उपासना का भी है।
इसलिए इस बार का जितिया व्रत माताओं और परिवारों के लिए और भी ज्यादा शुभ और कल्याणकारी माना जा रहा है।

Sachcha Samachar Desk

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