बिहार 

मुंगेर में डूबने से दो युवकों की मौत, परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल

On: September 3, 2025 8:35 PM
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मुंगेर में डूबने से दो युवकों की मौत, परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल
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मुंगेर (बिहार)। बाढ़ और जलभराव से प्रभावित मुंगेर जिले में डूबने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जिले के दो अलग-अलग स्थानों पर मंगलवार को हुई दर्दनाक घटनाओं में दो युवकों की जान चली गई। इनमें एक 20 वर्षीय युवक नीरज कुमार और दूसरा 14 वर्षीय किशोर चंदन कुमार शामिल है। दोनों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में गुस्सा और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आक्रोश भी देखने को मिला।

इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में मातम छा गया है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेज दिया है। पिछले तीन दिनों में डूबने से यह तीसरी मौत है जबकि एक युवक की तलाश अब भी जारी है।


पहली घटना: पूजा सामग्री विसर्जन के दौरान 20 वर्षीय युवक की मौत

पहली घटना जमालपुर थाना क्षेत्र के इंद्रुख-भलार पथ के पास हुई। यहाँ मंगलवार सुबह 20 वर्षीय नीरज कुमार, पिता प्रमोद यादव, निवासी छोटे गोविंदपुर, पूजा सामग्री के विसर्जन के दौरान बाढ़ के पानी में डूब गया। ग्रामीणों के अनुसार नीरज बाहर मजदूरी करता था और हाल ही में अपने गांव लौटा था।

जैसे ही डूबने की खबर फैली, परिजनों में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजन और ग्रामीण शव को सड़क पर रखकर जमालपुर-धरारा मुख्य मार्ग जाम कर दिए। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को सरकारी मुआवजा मिले और प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

सूचना मिलते ही जमालपुर के सीओ और थाना अध्यक्ष मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और सरकारी नियमों के तहत मुआवजा देने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम हटाया गया।


दूसरी घटना: नहाने गए किशोर की मौत

दूसरी घटना धरारा प्रखंड के लड़ैया टांड थाना क्षेत्र के बगलवा सत घरवा जलाशय में हुई। यहां मंगलवार दोपहर चार दोस्त नहाने गए थे। इसी दौरान 14 वर्षीय चंदन कुमार, पिता रंजय पाल, निवासी बंगलवा पाल टोला, गहरे पानी में चला गया।

ग्रामीणों और दोस्तों ने काफी मशक्कत की, लेकिन चंदन को बचाया नहीं जा सका। बाद में शव को बाहर निकाला गया। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेज दिया।

चंदन की मौत के बाद उसके घर में मातम छा गया। मां लीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि चंदन मंगलवार सुबह 10-11 बजे घर से निकला था। कुछ देर बाद बड़े बेटे ने आकर बताया कि चंदन डूब गया है। लीला देवी ने कहा—“हमको कुछ नहीं मालूम था। बस बड़े बेटे ने आकर कहा कि चंदन नहीं रहा।”

ग्रामीणों ने बताया कि चंदन आठवीं कक्षा का छात्र था और पढ़ाई में भी अच्छा था। उसकी अचानक मौत से गांव में शोक का माहौल है।


तीन दिन में तीसरी घटना

मुंगेर में बाढ़ और जलभराव के कारण लगातार डूबने की घटनाएं हो रही हैं। पिछले तीन दिनों में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक युवक की तलाश अभी भी जारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए। खासकर पूजा सामग्री के विसर्जन और नहाने के दौरान लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं दिखती।


पुलिस की अपील

दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने गश्ती तेज कर दी है। साथ ही, ग्रामीणों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित इलाकों और गहरे पानी वाले क्षेत्रों से दूर रहें। थाना प्रभारी ने कहा कि—“बरसात और बाढ़ के समय लापरवाही से जान जोखिम में पड़ सकती है। अभिभावक बच्चों को जलाशयों और नदी किनारों पर जाने से रोकें।”


परिजनों का दर्द और गुस्सा

नीरज और चंदन की मौत से उनके परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक तरफ मजदूरी करके परिवार चलाने वाला बेटा नीरज हमेशा के लिए चला गया, वहीं दूसरी तरफ महज 14 साल का चंदन, जो पढ़ाई करके परिवार का सहारा बनने का सपना देख रहा था, वह भी इस दुनिया से चला गया।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ मुआवजे का आश्वासन देने से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे। बाढ़ग्रस्त इलाकों में गश्ती दल की तैनाती, चेतावनी बोर्ड और अस्थायी सुरक्षा घेराबंदी की जरूरत है।


प्रशासन और सरकार से उम्मीदें

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।


निष्कर्ष

मुंगेर में एक ही दिन में डूबने से दो मौतें होना गंभीर चिंता का विषय है। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि ग्रामीणों की असुरक्षा की स्थिति को भी सामने लाता है। परिजनों का दर्द और ग्रामीणों का गुस्सा इस बात का संकेत है कि अब प्रशासन को सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।

पिछले तीन दिनों में लगातार डूबने की घटनाओं ने जिले के लोगों को डरा दिया है। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर एक ऐसी रणनीति बनाए, जिससे भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।

Sachcha Samachar Desk

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