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Samudra Pradakshina: भारत की 10 महिला योद्धा 26,000 मील की समुद्री यात्रा पर – जानिए इस ऐतिहासिक अभियान की पूरी कहानी

On: September 11, 2025 2:59 PM
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Samudra Pradakshina: भारत की 10 महिला योद्धा 26,000 मील की समुद्री यात्रा पर – जानिए इस ऐतिहासिक अभियान की पूरी कहानी
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भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ (Samudra Pradakshina) अभियान की शुरुआत की। यह दुनिया का पहला त्रि-सेवा (Tri-service) ऑल-वुमन सर्कमनैविगेशन सेलिंग एक्सपीडिशन है, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना की 10 महिला अधिकारी शामिल हैं।

ये महिला योद्धा अगले 9 महीनों तक 26,000 समुद्री मील (nautical miles) की यात्रा करेंगी और दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों को पार कर मई 2026 में मुंबई लौटेंगी। यह केवल एक नौका यात्रा नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति, आत्मनिर्भर भारत, सैन्य कूटनीति और वैश्विक दृष्टिकोण का जीवंत प्रतीक है।


इस यात्रा में क्या होगा खास?

  1. जहाज का नाम और निर्माण – ये अधिकारी भारतीय थल सेना की स्वदेशी नौका IASV त्रिवेणी पर सफर कर रही हैं। 50 फुट लंबी इस यॉट को पुदुच्चेरी में बनाया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत का सशक्त उदाहरण है।
  2. रूट और दूरी – दल पूर्व की ओर बढ़ते हुए एक्वेटर को दो बार पार करेगा और तीन बड़े केप्स (Cape Leeuwin, Cape Horn और Cape of Good Hope) को पार करेगा।
  3. समुद्र और चुनौतियां – यात्रा में दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) और ड्रेक पैसेज (Drake Passage) जैसी खतरनाक जगहों से गुजरना होगा। यहां ऊंची लहरें, तेज़ बर्फीली हवाएं और अप्रत्याशित तूफान दल की सबसे बड़ी परीक्षा होंगे।
  4. अंतरराष्ट्रीय पड़ाव – इस मिशन के दौरान ऑस्ट्रेलिया (Fremantle), न्यूजीलैंड (Lyttelton), कनाडा (Port Stanley) और दक्षिण अफ्रीका (Cape Town) में रुकाव होगा। ये पड़ाव न सिर्फ नौवहन (navigation) के लिहाज से अहम होंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सैन्य कूटनीति को भी मजबूत करेंगे।

दल की कमान किनके हाथ में?

इस ऐतिहासिक अभियान में शामिल दल पूरी तरह महिलाओं का है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  • एक्सपीडिशन लीडर: लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर
  • डिप्टी लीडर: स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा पी राजू
  • अन्य सदस्य: मेजर करमजीत कौर, मेजर ओमिता दलवी, कैप्टन प्राजक्ता पी निकम, कैप्टन दौली बुटोला, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं, विंग कमांडर विभा सिंह, स्क्वाड्रन लीडर अरुवी जयराम और स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी

इन अधिकारियों ने पिछले तीन वर्षों में कड़ा प्रशिक्षण लिया है। इसमें पश्चिमी तट पर छोटे अभियानों से लेकर मुंबई से सेशेल्स तक की अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी शामिल है।


अनुशासन और आत्मविश्वास की पराकाष्ठा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ सिर्फ जहाज पर यात्रा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना और अनुशासन व इच्छाशक्ति की पराकाष्ठा है।

उन्होंने कहा –

“हमारी अधिकारी इस अभियान में कई चुनौतियों का सामना करेंगी, लेकिन उनका संकल्प अंधकार को चीरकर प्रकाश की तरह उभरेगा। वे सुरक्षित लौटेंगी और दुनिया को दिखाएंगी कि भारतीय महिलाओं का साहस असीमित है।”


समुद्री विज्ञान में भी योगदान

यात्रा केवल रोमांच तक सीमित नहीं रहेगी। इस दौरान दल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के साथ मिलकर वैज्ञानिक अध्ययन भी करेगा।

  • समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का अध्ययन
  • समुद्री जीवों का दस्तावेजीकरण
  • महासागरीय स्वास्थ्य पर जागरूकता

इससे समुद्री संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी भारत की भूमिका मजबूत होगी।


भारत का गौरवशाली समुद्री इतिहास

भारत का सर्कमनैविगेशन इतिहास गौरवशाली रहा है।

  • कैप्टन दिलीप डोंडे (2009-10) – भारत के पहले एकल सर्कमनैविगेटर
  • कमांडर अभिलाष टॉमी (2012-13) – पहले भारतीय जिन्होंने बिना रुके यात्रा पूरी की
  • नाविका सागर परिक्रमा (2017-18) – पहली भारतीय महिला नौसेना टीम ने दुनिया का चक्कर लगाया
  • INSV तरिणी (2024-25) – हाल ही में दो महिला नौसैनिक अधिकारियों ने डबल-हैंडेड सर्कमनैविगेशन कर इतिहास रचा

अब IASV त्रिवेणी पर यह 10 सदस्यीय त्रि-सेवा महिला टीम इस सुनहरे अध्याय में नई इबारत लिखने निकली है।


सैन्य कूटनीति और वैश्विक दृष्टिकोण

यह अभियान सिर्फ खेल या साहस तक सीमित नहीं है। यह भारत की सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) और वैश्विक दृष्टिकोण (Global Vision) को भी दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर रुकते समय ये महिलाएं न केवल भारत की नौसैनिक क्षमता बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी संदेश दुनिया तक पहुँचाएंगी।


IASV त्रिवेणी: आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

50 फुट लंबी यह यॉट ‘त्रिवेणी’ पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी है। हर समुद्री मील के साथ यह भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र में नवाचार का संदेश लेकर आगे बढ़ेगी।


निष्कर्ष

‘समुद्र प्रदक्षिणा’ केवल एक यात्रा नहीं है, यह भारतीय नारी शक्ति की ताकत, आत्मविश्वास और अनुशासन की वैश्विक घोषणा है। जब ये दस अधिकारी मई 2026 में मुंबई लौटेंगी, तो वे केवल एक जहाज नहीं बल्कि भारत के गर्व और गौरव की कहानी लेकर लौटेंगी।

यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा कि भारत की बेटियां किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं – चाहे वह समुद्र की ऊंची लहरें हों या जीवन की कठिनाइयाँ।


✍️ लेखक की टिप्पणी:
यह यात्रा सिर्फ महासागरों की नहीं, बल्कि भारत के सपनों, इच्छाशक्ति और वैश्विक पहचान की भी यात्रा है। जब पूरी दुनिया देखेगी कि भारतीय महिलाएं समुद्र के सबसे कठिन रास्तों को पार कर सकती हैं, तब यह संदेश भी जाएगा कि भारत का भविष्य नारी शक्ति के नेतृत्व में और भी मजबूत है।

Sachcha Samachar Desk

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