बिहार के रक्सौल में भारत और नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। सीमा सुरक्षा बल (SSB) के मुख्यालय में हुई इस ‘इंडो-नेपाल जॉइंट फील्ड सर्वे’ की पहली बैठक में दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की।
द्विपक्षीय सहयोग पर जोर: अधिकारियों का जमावड़ा
इस उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने किया, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की कमान सिराहा जिले के सीडीओ (Chief District Officer) सुरेंद्र पौडेल के हाथों में रही।
बैठक में भारत की ओर से सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के डीएम एवं एसपी शामिल हुए। वहीं, नेपाल की तरफ से सिराहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, सप्तरी, रौतहट, बारा, पर्सा और चितवन के सीडीओ ने हिस्सा लिया।
सीमा सर्वेक्षण और पिलरों के रखरखाव पर बनी सहमति
बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और आपसी समन्वय बढ़ाना था। चर्चा के दौरान जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने 7वें बाउंड्री वर्किंग ग्रुप और 12वीं सर्वे ऑफिशियल कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए भविष्य की कार्ययोजना साझा की।
बैठक में मुख्य रूप से इन 5 बिंदुओं पर सहमति बनी:
- पिलरों की मरम्मत और निर्माण: सीमा पर लगे पुराने पिलरों की मरम्मत की जाएगी और जहाँ आवश्यकता है, वहाँ नए पिलर बनाए जाएंगे।
- गायब पिलरों की खोज: जो पिलर समय के साथ गायब या विस्थापित हो गए हैं, उन्हें फिर से सही स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
- क्षतिग्रस्त पिलरों का पुनर्निर्माण: टूट चुके पिलरों को फिर से बनाया जाएगा ताकि सीमा स्पष्ट रहे।
- UAV (ड्रोन) से मैपिंग: सीमा क्षेत्रों की सटीक मैपिंग के लिए आधुनिक तकनीक और ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।
- बाउंड्री रेफरेंस फ्रेम: भारत-नेपाल सीमा के लिए एक साझा रेफरेंस फ्रेम तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस बैठक की सबसे खास बात सीमा की निगरानी और मैपिंग के लिए UAV (Unmanned Aerial Vehicle) यानी ड्रोन के इस्तेमाल पर बनी सहमति है। इससे न केवल मैपिंग सटीक होगी, बल्कि दुर्गम इलाकों में भी सीमा की स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। बैठक के अंत में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा पर शांति और आपसी सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई।






