बिहार के मुंगेर जिले से एक बार फिर नशे के काले कारोबार से जुड़ी हैरान कर देने वाली ख़बर सामने आई है। हवेली खड़कपुर थाना क्षेत्र में, पुलिस ने एक पक्की गुप्त सूचना पर बिजली की तेज़ी से कार्रवाई करते हुए, स्मैक तस्करी के एक पूरे रैकेट को ध्वस्त कर दिया है और छह शातिर लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सिर्फ़ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही; पुलिस ने न केवल 28 ग्राम स्मैक बरामद की है, बल्कि तस्करों के पूरे सामान-ए-जंग को भी सीज कर लिया है—इसमें पैकिंग का सामान, डिजिटल वेटिंग मशीन, मोबाइल फ़ोन, एटीएम कार्ड, और उनके पास मौजूद नगदी का ढेर भी शामिल है।
हवेली खड़कपुर के डीएसपी अनिल कुमार ने जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी, इलाक़े में हड़कंप मच गया। उन्होंने खुलासा किया कि इस गैंग का सरगना पश्चिम अजीमगंज का रहने वाला विभास उर्फ बिबिया है। विभास कोई नया खिलाड़ी नहीं है, बल्कि उसके ख़िलाफ़ पहले से ही आठ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं—यानी वह पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में ‘दागी’ है।
पर्दे के पीछे क्या हुआ?
पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से टिप मिली थी कि हवेली खड़कपुर के वनवर्षा गांव में बड़े पैमाने पर स्मैक की खरीद-बिक्री चल रही है। ख़बर की गंभीरता को समझा गया और एसपी मुंगेर के आदेश पर, डीएसपी अनिल कुमार की अगुवाई में एक धुरंधर टीम फौरन मैदान में उतार दी गई।
टीम ने सीधे मोहित आनंद के घर पर छापा मारा। जो दिखा, उससे सबके होश उड़ गए: छह लोग खुलेआम बैठकर स्मैक की छोटी-छोटी पुड़ियाँ बना रहे थे! पुलिस ने मौके का फ़ायदा उठाया और उन्हें हाथों-हाथ पकड़ लिया। क्या-क्या मिला? 28 ग्राम स्मैक के साथ-साथ, छह मोबाइल फ़ोन, मेहनत की कमाई (₹18,450 नगद), बड़ी नाप-तौल वाली डिजिटल मशीन, लॉटरी टिकट, एटीएम कार्ड, और नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले पाइप और सिल्वर फॉइल। ज़ाहिर है, पूरा सेटअप चल रहा था।
कौन-कौन पकड़े गए?
ये वो छह तस्कर हैं, जिनकी वजह से इलाके के युवाओं की ज़िंदगी दाँव पर लगी थी:
- विभास उर्फ बिबिया (मास्टरमाइंड, पश्चिम अजीमगंज निवासी)
- मोहित आनंद (वनवर्षा गांव निवासी, जिसके घर को अड्डा बनाया गया था)
- आनंद शाह
- अभिषेक कुमार
- राजकुमार
- शुभम कुमार
पुलिस ने साफ़ किया कि यह गिरोह काफ़ी वक़्त से यह गंदा काम कर रहा था, और इनकी सक्रियता को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं।
मास्टरमाइंड विभास: एक अपराधी की कहानी
विभास उर्फ बिबिया इस गैंग का मुख्य चेहरा है। पुलिस ने उसके इतिहास को खोलकर बताया। खड़कपुर थाने में ही उसके ख़िलाफ़ आठ मामले पहले से दर्ज हैं। इसका मतलब है कि यह शख़्स नशे के धंधे से लेकर दूसरे अपराधों में भी गहराई तक लिप्त रहा है।
पुलिस ने विभास और उसके साथियों को सीधा जेल भेज दिया है, लेकिन असली काम अब शुरू हुआ है—इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी जाँच जारी है।
मुंगेर की बढ़ती चिंता: नशे के जाल को तोड़ना ज़रूरी
यह कोई छिपी बात नहीं है कि मुंगेर में पिछले कुछ सालों से नशे का कारोबार एक बड़ी आफ़त बन चुका है। स्मैक और दूसरे नशीले पदार्थों की तस्करी युवाओं की ज़िंदगी लील रही है। स्थानीय लोगों का ग़ुस्सा जायज़ है—उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है और इस पर सख़्त से सख़्त लगाम लगाने की ज़रूरत है।
पुलिस का अगला कदम और जनता से अपील
डीएसपी अनिल कुमार ने कसम खाई है कि पुलिस इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुँचेगी। उन्होंने कहा कि बरामद एटीएम कार्ड और बैंक दस्तावेज़ों की बारिकी से जांच होगी ताकि यह पता चल सके कि पैसे का लेन-देन कहाँ से और किसके ज़रिए हो रहा था। पुलिस इस 28 ग्राम स्मैक के स्रोत का पता लगाने में जुटी है, और अन्य सहयोगियों पर भी नज़र है।
पुलिस ने हाथ जोड़कर लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कहीं भी इस ज़हर के कारोबार की भनक लगे, तो डरें नहीं, तुरंत पुलिस को सूचना दें। उनका मानना है कि नशे की लत न सिर्फ़ परिवारों को तबाह करती है, बल्कि पूरे समाज के लिए ख़तरा है।
निष्कर्ष: मुंगेर पुलिस की यह कार्रवाई काबिले तारीफ है, जिसने इन छह तस्करों को पर्दे के पीछे से खींचकर बाहर निकाला। मगर, जब तक पूरे नेटवर्क को उखाड़ नहीं फेंका जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी, जिसके लिए पुलिस की सख्ती और समाज की जागरूकता दोनों ही बेहद ज़रूरी हैं।








