मुंगेर, बिहार। मुंगेर जिले के तारापुर थाना क्षेत्र में ₹1 लाख के लिए अपनी माँ की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या करने वाले आरोपी बेटे को मुंगेर की एक अदालत ने आज आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। इस जघन्य हत्याकांड पर आए फैसले ने पूरे ज़िले में सनसनी फैला दी है और इसे ऐसे अपराधों को रोकने की दिशा में एक बड़ा सबक माना जा रहा है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 प्रपल दत्ता की कोर्ट ने आरोपी ललित कुमार सिंह को उसकी माँ फुलवारी देवी की हत्या के लिए दोषी मानते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। बताया जा रहा है कि पैसों के लालच में बेटा इतना अंधा हो गया था कि उसने उस माँ को मौत के घाट उतार दिया, जिसने उसे पाला-पोसा था।
मोहनगंज हत्याकांड: पैसों के लिए बेटे ने किया ख़ूनी खेल
यह दर्दनाक मामला 16 अक्टूबर 2022 का है। तारापुर के मोहनगंज गाँव में हुई बुजुर्ग फुलवारी देवी की हत्या की ख़बर ने पूरे इलाक़े को झकझोर कर रख दिया था। शुरुआती जाँच में पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना मुश्किल था, लेकिन जैसे-जैसे तहक़ीकात आगे बढ़ी, हत्यारे का चेहरा सामने आया।
दरअसल, फुलवारी देवी के दोनों बेटे भागलपुर में रहते थे। छोटा बेटा ललित कुमार सिंह कुछ दिन पहले अपनी माँ से मिलने गाँव आया था, लेकिन उसका असली मकसद माँ के बैंक खाते में जमा ₹1 लाख हासिल करना था। पैसों की सख़्त ज़रूरत होने पर ललित ने कई बार माँ से माँग की, लेकिन फुलवारी देवी ने साफ़ इनकार कर दिया। उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि जिस बेटे से वह इतना प्यार करती हैं, वही पैसों के लिए उनकी जान ले लेगा।
गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से किए कई वार
घटना वाली रात, जब ललित कुमार सिंह को लगा कि उसकी माँ पैसे देने को तैयार नहीं होंगी, तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया। इसी दौरान उसने घर में रखी कुल्हाड़ी उठाई और अपनी सोयी हुई माँ पर वार कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, ललित ने फुलवारी देवी के गले और कान पर कई वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद, ललित ने अपराध छिपाने की पूरी कोशिश की और गाँव से भागकर वापस भागलपुर चला गया। अगले दिन गाँव वालों को जब हत्या की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
एक छोटी-सी गलती ने खोल दिया राज
पुलिस जब मौके पर पहुँची, तो फुलवारी देवी का शव खून से लथपथ मिला। शुरुआती शक ललित पर गया, क्योंकि वह घटना से ठीक दो दिन पहले ही गाँव आया था। इस बीच, ललित कुमार सिंह भी पुलिस को गुमराह करने के इरादे से माँ के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए अस्पताल पहुँचा।
लेकिन यहीं उसने एक बड़ी गलती कर दी। ललित ने जो गंजी (टी-शर्ट) पहन रखी थी, उस पर खून के निशान लगे थे। पुलिस ने तुरंत शक के आधार पर उसे हिरासत में लिया और सख़्ती से पूछताछ की। पहले तो ललित ने इनकार किया, लेकिन बाद में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने न सिर्फ़ हत्या का जुर्म स्वीकार किया, बल्कि हत्या में इस्तेमाल हुई कुल्हाड़ी के बारे में भी बताया, जिसे पुलिस ने बाद में बरामद कर लिया।
पुलिस ने ललित की गंजी और बरामद कुल्हाड़ी को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा था। रिपोर्ट में यह साफ़ हो गया कि दोनों पर लगा खून इंसानी खून था और वह फुलवारी देवी के खून से मेल खाता था। इन ठोस सबूतों ने ललित के ख़िलाफ़ मुक़दमे को बेहद मज़बूत बना दिया।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: आजीवन कारावास
मृतक फुलवारी देवी के बड़े बेटे कृष्णदेव सिंह के बयान पर तारापुर थाना में कांड संख्या 175/ 2022 दर्ज किया गया था। यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 प्रपल कुमार दत्ता की कोर्ट में चला। इस केस में अभियोजन पक्ष की तरफ़ से अपर लोक अभियोजक राम सेवक मंडल ने सभी मज़बूत सबूत और दलीलें पेश कीं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को बारीकी से परखने के बाद, कोर्ट ने ललित कुमार सिंह को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी पाया। एडीजे-2 प्रपल कुमार दत्ता की कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए ललित को आजीवन कारावास की सज़ा दी। इसके साथ ही, उस पर ₹500 का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फैसले के बाद, अपर लोक अभियोजक राम सेवक मंडल ने कहा, “यह फैसला दिखाता है कि कानून की नज़र में कोई भी अपराध छोटा नहीं होता। इस तरह के फैसले समाज में एक मज़बूत संदेश देते हैं कि कोई भी व्यक्ति कानून से बड़ा नहीं है।” फ़िलहाल, ललित कुमार सिंह को पुलिस ने तुरंत हिरासत में लेकर मुंगेर जेल भेज दिया है। यह मामला मुंगेर में माँ की हत्या और बेटे को आजीवन कारावास की घटना के तौर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।








