बिहार के मुंगेर ज़िले में मंगलवार की शाम जो कुछ हुआ, उसने पूरे नया गांव जर बहेरा बाजार में सन्नाटा खींच दिया था। अचानक बाइक सवार युवकों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी—सोचिए, बाज़ार में चलते-फिरते लोगों के बीच ऐसी वारदात! स्थानीय लोग तो मानो सहम ही गए थे। यह सिर्फ़ एक गोलीबारी नहीं थी, यह इलाके की शांति पर हमला था, जिसने लोगों के मन में गहरी दहशत बिठा दी थी।
मगर मुंगेर पुलिस ने इस मामले को बिल्कुल अलग तरीके से लिया। घटना की सूचना मिलते ही महज़ 24 घंटे के भीतर पुलिस ने इस पेचीदा गुत्थी को सुलझाते हुए एक नाबालिग आरोपी को धर दबोचा। पुलिस की यह तत्परता वाकई काबिले-तारीफ़ है।
नाबालिग का इकबाल-ए-जुर्म: बड़ी वारदात की थी तैयारी
गिरफ्तार नाबालिग के पास से पुलिस को क्या-क्या मिला, यह सुनकर आप चौंक जाएंगे: एक बाइक, हेलमेट, ₹1000 नकद, और सबसे ख़तरनाक, उसकी निशानदेही पर एक देसी कट्टा और दो ज़िंदा कारतूस। पूछताछ में उसने न सिर्फ़ फायरिंग में शामिल होने की बात झट से मान ली, बल्कि एक और डरावना सच भी सामने आया—वह और उसके साथी किसी बड़ी आपराधिक साज़िश को अंजाम देने की फ़िराक में थे।
एसडीपीओ अभिषेक आनंद ने किया पर्दाफाश
घटना का ब्योरा देते हुए मुंगेर सदर एसडीपीओ अभिषेक आनंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सबसे पहले घटना में इस्तेमाल हुई बाइक की पहचान की। इसके बाद उन्हें गुप्त सूचना मिली कि आरोपी अपनी बाइक के साथ किला क्षेत्र स्थित न्यायालय और एसडीओ ऑफिस के पास मंडरा रहा है।
जैसे ही यह सूचना मिली, पुलिस टीम बिना एक पल गंवाए सक्रिय हो गई और इलाके की घेराबंदी कर दी। आरोपी ने भागने की नाकाम कोशिश की, लेकिन पुलिस की टीम ने तेज़ी दिखाते हुए उसे दबोच लिया। तलाशी में नकदी और वही बाइक मिली। बाद में उसने श्यामपुर हाईवे पुल के पास झाड़ियों में छिपाए देसी कट्टे और कारतूस का भी पता बताया।
पुलिस की यह दक्षता कितनी महत्वपूर्ण थी, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी समय पर की गई कार्रवाई ने न केवल इस फायरिंग कांड को खोला, बल्कि एक और संभावित ख़ूनी वारदात को भी टाल दिया गया।
चिंताजनक पहलू: पुराने अपराध से लिंक और नाबालिगों का इस्तेमाल
जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है—गिरफ्तार नाबालिग का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। वह पहले भी एक हत्या के मामले में आरोपी रह चुका है और फिलहाल ज़मानत (बेल) पर था। पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि कहीं इस ताज़ा फायरिंग कांड का सीधा संबंध उसके पुराने मामले से तो नहीं है।
एसडीपीओ अभिषेक आनंद ने कठोर लहजे में कहा है कि अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द की जाएगी।
लोगों में दहशत अब राहत में बदली
बाज़ार में हुई इस अचानक गोलीबारी ने स्थानीय लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया था। लोग स्तब्ध थे और सहमे हुए थे। लेकिन पुलिस की तेज और सफल कार्रवाई ने अब उन्हें राहत की सांस लेने का मौका दिया है। इलाके के लोगों ने पुलिस की तत्परता की खुलकर सराहना की है। उनका मानना है कि अगर पुलिस देर करती, तो परिणाम बहुत भयावह हो सकते थे।
निष्कर्ष
मुंगेर का यह मामला केवल एक फायरिंग की घटना भर नहीं है; यह इस बात की गंभीर चेतावनी है कि अपराधी कैसे अब नाबालिगों को भी अपने काले धंधों में धकेल रहे हैं। पुलिस की मुस्तैदी ने साबित कर दिया कि कानून का शिकंजा अपराधियों से ज़्यादा मज़बूत है।
फिलहाल, पुलिस नाबालिग से हर पहलू पर लगातार पूछताछ कर रही है, और जल्द ही अन्य फरार आरोपियों के भी गिरफ्त में आने की उम्मीद है।
क्या आपको लगता है कि इस तरह के मामलों में नाबालिगों को आपराधिक गिरोहों से बचाने के लिए समाज को और क्या कदम उठाने चाहिए?








