बिहार सरकार के सख्त निर्देशों के बाद पूर्वी चंपारण जिले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान तेज हो गया है। इसी कड़ी में मंगलवार, 24 मार्च 2026 को कोटवा प्रखंड में प्रशासन की विशेष टीम ने छापेमारी कर तीन बाल श्रमिकों को बंधनों से मुक्त कराया।
विशेष धावा दल की छापेमारी और रेस्क्यू
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के निर्देश पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (कोटवा) के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया था। इस टीम ने कोटवा प्रखंड के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान टीम ने दो प्रमुख जगहों पर कार्रवाई की:
- Teamax Coffee: यहाँ से 02 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया।
- अंकित मोटर पार्ट्स: यहाँ से 01 बाल श्रमिक को रेस्क्यू किया गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके के व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है। मुक्त कराए गए सभी तीनों बच्चों को सुरक्षित प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति, पूर्वी चंपारण के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें फिलहाल बाल गृह भेज दिया गया है।
नियोक्ताओं पर होगी एफआईआर और भारी जुर्माना
श्रम अधीक्षक रमाकांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों से काम कराना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से अपराध भी है।
दोषियों पर होने वाली कानूनी कार्रवाई:
- प्राथमिकी (FIR): बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत दोनों प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ संबंधित थाने में केस दर्ज किया जा रहा है।
- सजा और जुर्माना: कानून के मुताबिक, बच्चों से काम कराने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 2 साल तक की जेल हो सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, नियोक्ताओं से प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये की अतिरिक्त राशि भी वसूली जाएगी।
जांच टीम में ये रहे शामिल
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का बड़ा तालमेल देखने को मिला। टीम में पिपराकोठी, सुगौली, चिरैया, फेनहरा और हरसिद्धि के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी शामिल थे।
साथ ही, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के इंस्पेक्टर सर्वेंद्र कुमार सिन्हा, पुलिस लाइन के जवान और ‘प्रयास’ संस्था, डंकन हॉस्पिटल (रक्सौल) व ग्राम नियोजन केंद्र के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
श्रम अधीक्षक का संदेश: “बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान पूर्वी चंपारण में लगातार जारी रहेगा। किसी भी प्रतिष्ठान में बच्चों से काम कराते पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”






