बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से भू-माफियाओं के दुस्साहस की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अब तक निजी जमीनों पर नजर रखने वाले भू-माफियाओं ने अब सरकारी संसाधनों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया है। ताजा मामला संग्रामपुर प्रखंड का है, जहाँ एक सक्रिय नहर की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
संग्रामपुर प्रखंड के दक्षिणी मधुबनी पंचायत (नंदपुर, वार्ड संख्या 7) में स्थित एक पुरानी नहर पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह नहर वर्षों से चालू है और इसमें नियमित रूप से पानी आता है। इस नहर से क्षेत्र के सैकड़ों किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं।
आरोप है कि कुछ रसूखदार भू-माफियाओं ने न केवल इस सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की, बल्कि कथित तौर पर इसकी रजिस्ट्री कराकर इसे हड़पने का प्रयास भी किया जा रहा है।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, प्रशासन से न्याय की गुहार
नहर पर कब्जे की खबर फैलते ही स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नहर के बहाव को रोका गया या उसकी जमीन पर निर्माण किया गया, तो किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम:
- ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस मामले की शिकायत अंचलाधिकारी (CO) के जनता दरबार में की है।
- स्थानीय निवासी विनय कुमार मिश्रा ने ग्रामीणों की ओर से औपचारिक आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- लोगों का दावा है कि नहर के बाधित होने से खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है।
सिंचाई व्यवस्था पर मंडराता खतरा
किसानों के लिए यह नहर जीवन रेखा के समान है। यदि समय रहते इस अतिक्रमण को नहीं हटाया गया, तो जल प्रवाह पूरी तरह बाधित हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
विशेष संदर्भ: बिहार में सरकारी जमीन और जल निकायों (नहर, पोखर, पैन) पर अतिक्रमण एक गंभीर कानूनी अपराध है। राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग की जमीन की खरीद-बिक्री अवैध मानी जाती है।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और अंचलाधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या प्रशासन इन भू-माफियाओं के चंगुल से नहर को मुक्त करा पाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।






