मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण। बिहार सरकार द्वारा लागू ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम-2015’ आम जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है। ताजा मामला मोतिहारी का है, जहाँ एक महिला उपभोक्ता को विभाग की गलती के कारण आए भारी-भरकम बिजली बिल से निजात मिली है। जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने अपनी गलती मानी और बिल में सुधार किया।
क्या था पूरा मामला?
छतौनी थाना क्षेत्र के छोटा बरियारपुर (विरसा नगर) की रहने वाली राजमहल देवी (पति स्व. अनिरुद्ध सिंह) एक नियमित बिजली उपभोक्ता हैं। वे समय पर अपने बिजली बिल (उपभोक्ता संख्या- 400526511) का भुगतान करती आ रही थीं। लेकिन अचानक विभाग की ओर से उन्हें 90,449 रुपये का बिल भेज दिया गया।
इतना बड़ा बिल देखकर उपभोक्ता परेशान हो गईं और उन्होंने सुधार के लिए जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय, पूर्वी चम्पारण में न्याय की गुहार लगाई।
गलत रीडिंग बनी थी मुसीबत का कारण
शिकायत दर्ज होने के बाद लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने त्वरित संज्ञान लिया। मामले की सुनवाई के दौरान विद्युत कार्यपालक अभियंता (मोतिहारी प्रमंडल) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।
जाँच में यह बात सामने आई कि बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा गलत रीडिंग फीड कर दी गई थी। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
- पहले गलत तरीके से 14,816 यूनिट का बिल बना दिया गया था।
- दोबारा जाँच करने पर पाया गया कि वास्तविक अंतर केवल 447 यूनिट का था।
90 हजार की जगह अब देना होगा मात्र 6 रुपये
लोक शिकायत निवारण केंद्र की सख्ती के बाद बिजली विभाग ने अपनी गलती सुधारी। विभाग ने कुल 90,449 रुपये के बिल में से 90,443 रुपये की कटौती कर दी। अब राजमहल देवी को बकाया राशि के रूप में मात्र 6 रुपये का भुगतान करना होगा। इस फैसले से परिवादी ने राहत की सांस ली है और उनके मामले का पूर्ण निवारण हो गया है।
‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा हो रही साकार
यह मामला बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की सफलता का एक बड़ा उदाहरण है। यह कानून आम नागरिकों को यह अधिकार देता है कि वे बिना किसी बिचौलिए के, अपनी सरकारी समस्याओं का समाधान एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पा सकें। जिला प्रशासन का कहना है कि सुशासन के तहत हर नागरिक को समय पर न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






