पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात ने एक बड़े ड्रग्स तस्करी मामले में आरोपियों की रिहाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। करोड़ों रुपये की चरस बरामदगी के मामले में आरोपियों के जेल से बाहर आने पर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। इस लापरवाही या संभावित मिलीभगत की जांच के लिए अब तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों की टीम बनाई गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मार्च 2024 का है, जब सुगौली थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की थी। 21 मार्च को पुलिस ने घेराबंदी कर आलम मियां और ओमप्रकाश कुमार नाम के दो तस्करों को पकड़ा था, जिनके पास से 30 किलो चरस मिली थी। इनकी निशानदेही पर की गई अगली छापेमारी में 50 किलो और चरस बरामद हुई। कुल 80 किलो चरस और भारी मात्रा में गांजा जब्त किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों में थी।
तीन DSP करेंगे अधिकारियों की ‘कुंडली’ की जांच
इतनी बड़ी बरामदगी और ठोस सबूतों के दावों के बावजूद आरोपी कोर्ट से रिहा हो गए। इस पर संज्ञान लेते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम में शामिल अधिकारी हैं:
- डीएसपी (मुख्यालय)
- साइबर डीएसपी
- सदर डीएसपी
यह कमेटी इस बात की गहराई से जांच करेगी कि केस की डायरी लिखने, सबूत इकट्ठा करने या कोर्ट में पैरवी (प्रॉसिक्यूशन) के दौरान कहां चूक हुई।
जांच के घेरे में तत्कालीन थानेदार और आईओ
एसपी ने इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) मुन्ना कुमार, केस के अनुसंधान अधिकारी (IO) और अभियोजन अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध माना है। पुलिस को शक है कि केस को कमजोर करने के लिए जानबूझकर लापरवाही बरती गई या तस्करों के साथ कोई साठगांठ की गई।
“इतने बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की बरामदगी के बाद भी आरोपियों का रिहा होना गंभीर विषय है। यदि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी की मिलीभगत पाई गई, तो उन पर सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।” > — स्वर्ण प्रभात, एसपी, मोतिहारी
लापरवाही बरतने वालों पर गिरेगी गाज
जांच टीम को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपें। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अपराधियों को लाभ पहुँचाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।
संपादन: कंटेंट टीम, सच्चा समाचार।







