मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में प्रशासन ने बाल श्रम के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। जिले के असरगंज प्रखंड में श्रम विभाग की विशेष टीम ने छापेमारी कर विभिन्न प्रतिष्ठानों से चार बाल श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त कराया है। इस कार्रवाई से इलाके के व्यवसायियों और होटल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
विशेष टीम ने कई दुकानों और होटलों में दी दबिश
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO) कुमार अमन के नेतृत्व में गठित ‘विशेष धावा दल’ ने असरगंज प्रखंड के मुख्य बाजारों, होटलों, रेस्टोरेंट, मॉल और गैराजों में सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने पाया कि कुछ प्रतिष्ठानों में नियमों की अनदेखी कर नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा था। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से चार बच्चों को रेस्क्यू किया।
दोषियों पर दर्ज होगी FIR, प्रशासन सख्त
मुंगेर के श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चों से काम कराना ‘बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986’ के तहत गंभीर अपराध है। मुक्त कराए गए बच्चों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, जिन नियोक्ताओं ने इन बच्चों को काम पर रखा था, उनके विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस साल अब तक 50 बच्चे किए गए रेस्क्यू
प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुंगेर जिले में अब तक कुल 50 बाल श्रमिकों को अलग-अलग अभियानों के जरिए मुक्त कराया जा चुका है। श्रम अधीक्षक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह अभियान जिले के हर प्रखंड में लगातार जारी रहेगा।
व्यापारियों के लिए जरूरी संदेश
- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराना कानूनन जुर्म है।
- 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में काम पर नहीं लगाया जा सकता।
- नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा दोनों हो सकती है।
निष्कर्ष: मुंगेर प्रशासन की यह सक्रियता समाज को यह संदेश देती है कि बच्चों का सही स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि स्कूल है। यदि आप भी कहीं बाल मजदूरी होते देखें, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या श्रम विभाग को सूचित करें।








