भागलपुर ज़िले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है, मानो कोई फिल्म चल रही हो। एक प्रेमी जोड़ा, जिसे अपने ही घरवालों का साथ नहीं मिला, आखिरकार गांव वालों के सहारे एक-दूजे का हो गया। मंदिर में बंधा पवित्र बंधन, कैमरे पर दिया गया बयान और सोशल मीडिया पर मचा जमकर हंगामा—इस पूरी कहानी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
घरवालों से छिपकर रचा प्लान
जानकारी के मुताबिक, यह मामला सनहौला थाना क्षेत्र का है। यहां के रहने वाले शिवम और साक्षी (नाम समाचार में आए) पिछले करीब एक साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन लड़की का परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था।
परिजनों के बढ़ते दबाव ने दोनों को इतना मजबूर कर दिया कि उन्होंने घर छोड़ने का कड़ा फैसला कर लिया। रातों-रात उन्होंने अपना छोटा-मोटा बैग समेटा और घरवालों की नजर से बचकर वे दूसरे गांव निकल पड़े।
मंदिर बना गवाह
कहानी में मोड़ तब आया जब दोनों अस्पताल के पास उदास बैठे मिले। ग्रामीणों को शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ की। जब असलियत सामने आई कि यह प्रेमी जोड़ा परिवार की नाराज़गी के कारण भागा है, तो गांव के लोगों ने ही उनका समर्थन किया।
ग्रामीणों ने साफ कहा – “अगर दोनों अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं तो क्यों रोका जाए? यह कैसी ज़िद है?” इसके बाद गांव वालों ने मिलकर मंदिर में पूरे विधि-विधान से उनकी शादी कराई।
सोशल मीडिया पर बयान: “नुकसान हुआ तो ज़िम्मेदार…”
शादी के तुरंत बाद दोनों ने खुद एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जो फौरन वायरल हो गया। इस वीडियो में उन्होंने साफ-साफ कहा:
साक्षी कुमारी बोलीं—
“हम अपनी पूरी इच्छा से घर से निकले हैं। अगर मेरे पति या उनके घरवालों को कोई नुकसान होता है तो जिम्मेदार मेरे घर वाले और चाचा होंगे। हम ये बात सबको बता रहे हैं।”
शिवम कुमार ने कहा—
“हम दोनों ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से शादी की है। हम खुश हैं और साथ रहना चाहते हैं। हमें किसी का डर नहीं है।”
वीडियो देखते ही सोशल मीडिया पर लोग चर्चा करने लगे। कुछ ने इसे “प्रेम की जीत” कहा, तो कुछ ने परिवार की जिद पर ज़ोरदार सवाल उठाए।
परिवार, समाज और कानूनी नजरिया
लड़की के परिवार वालों ने इस शादी को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें लड़का पसंद नहीं था और वे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर भी दबाव महसूस कर रहे थे।
वहीं, ग्रामीणों का तर्क बिल्कुल उल्टा था। उनका कहना था कि जब दोनों बालिग हैं और खुद फैसला कर रहे हैं तो किसी को रोकने का कोई हक़ नहीं।
कानूनी नजरिया
भारतीय कानून भी यही कहता है। अगर लड़का और लड़की दोनों 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं, तो वे अपनी इच्छा से शादी कर सकते हैं। परिवार या समाज का दबाव उनकी स्वतंत्रता नहीं छीन सकता। कोर्ट ने कई बार कहा है कि ऐसे जोड़ों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसलिए कानूनी रूप से यह शादी पूरी तरह वैध है।
बदलते समाज की तस्वीर
यह घटना केवल एक शादी की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की झलक है जो धीरे-धीरे बदल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्रेम विवाह को संदेह और विरोध की नजर से देखा जाता है। लेकिन शिवम और साक्षी जैसे युवाओं की हिम्मत बताती है कि अब नई पीढ़ी अपने महत्वपूर्ण फैसले खुद लेना चाहती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे मामलों में दो अहम पहलू होते हैं—
- युवाओं का अधिकार: उन्हें यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे अपने जीवन का साथी चुन सकें।
- परिवार की चिंता: कई बार परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षा को लेकर वास्तव में चिंतित रहता है।
इन दोनों के बीच संतुलन बनाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत और आपसी समझ है।
निष्कर्ष
भागलपुर का यह मामला एक साधारण प्रेम कहानी से कहीं ज्यादा है। यह बताता है कि समाज की परंपराएं और नई पीढ़ी की सोच किस तरह आमने-सामने टकराती हैं।
एक तरफ परिवार की परंपरा और सामाजिक दबाव है, तो दूसरी तरफ युवाओं की स्वतंत्रता और उनकी अपनी जिंदगी जीने की चाह।
फिलहाल, शिवम और साक्षी ने अपनी राह चुन ली है और उनकी शादी का वीडियो लोगों के बीच गरम चर्चा का विषय बना हुआ है। यह कहानी शायद उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन जाए, जो प्यार और कठोर परंपरा के बीच उलझे हुए हैं।








