बिहार 

बिहार में एनीमिया के खिलाफ जंग: गर्भवती महिलाओं के लिए ‘FCM थेरेपी’ अभियान का आगाज़

On: March 26, 2026 8:28 PM
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मोतिहारी | 26 मार्च, 2026 बिहार सरकार ने राज्य में मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने के लिए एक बड़ी पहल की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज राज्यव्यापी ‘फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) इंजेक्शन थेरेपी’ अभियान की शुरुआत की गई है।

​राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस विशेष अभियान का विधिवत उद्घाटन किया। इसी क्रम में पूर्वी चंपारण के मोतिहारी सदर अस्पताल में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने किया।

​बिहार में एनीमिया की स्थिति: एक गंभीर चुनौती

​राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि बिहार में लगभग 63% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से जूझ रही हैं। ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 63.9% महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। यह राष्ट्रीय औसत (52%) से काफी ज्यादा है, जिसे देखते हुए सरकार ने इस ठोस कदम को उठाने का निर्णय लिया है।

​क्या है FCM थेरेपी और कैसे मिलेगी सुविधा?

​एनीमिया से निपटने के लिए अब केवल गोलियों पर निर्भरता नहीं रहेगी। FCM थेरेपी के तहत सीधे नसों के माध्यम से आयरन दिया जाता है, जो शरीर में तेजी से खून का स्तर बढ़ाता है।

​अस्पताल में विशेष इंतजाम:

  • आरक्षित बेड: प्रत्येक जिला अस्पताल और चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों पर कम से कम 20 बेड और आई.वी. स्टैंड की विशेष व्यवस्था की गई है।
  • मुफ्त एम्बुलेंस: एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को घर से अस्पताल लाने और उपचार के बाद वापस सुरक्षित घर छोड़ने के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है।
  • विशेषज्ञ निगरानी: प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती की गई है ताकि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित रहे।

​किसे और कब दी जाएगी यह थेरेपी? (उपचार नियम)

​स्वास्थ्य विभाग ने इस थेरेपी के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं:

एनीमिया की स्थिति

हीमोग्लोबिन स्तर (Hb)

उपचार का तरीका

मध्यम एनीमिया

7 से 9.9 g/dl

34 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था पर प्राथमिकता से FCM थेरेपी।

गंभीर एनीमिया

5 से 6.9 g/dl

13 से 34 सप्ताह के बीच सीधे आई.वी. आयरन (IV Iron) उपचार।

 

विशेष सावधानी: इंजेक्शन देने के बाद मरीज को कम से कम 30 मिनट तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। आपात स्थिति के लिए जीवन रक्षक दवाएं हर केंद्र पर मौजूद रहेंगी।

​मोतिहारी में पहले दिन 17 महिलाओं का सफल उपचार

​अभियान के पहले दिन मोतिहारी सदर अस्पताल में जिले के विभिन्न प्रखंडों से 17 चिन्हित गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस के जरिए लाया गया। विशेषज्ञों की देखरेख में उन्हें FCM थेरेपी दी गई और स्वास्थ्य जांच के बाद सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया।

​इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार के साथ डॉ. सच्चिदानंद सत्यार्थी, डॉ. सुरुचि स्मृति, नंदन झा और पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निष्कर्ष: > ‘एनीमिया मुक्त बिहार’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

Sachcha Samachar Desk

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