भागलपुर, सबौर: भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड का सरधो गाँव इन दिनों एक सड़क निर्माण को लेकर चर्चा में है—मगर अच्छे कारणों से नहीं। यहाँ बन रही सड़क में गंभीर धांधली के आरोप लगे हैं, और सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता पर है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की जो मोटाई 5 इंच होनी चाहिए थी, ठेकेदार ने उसे कहीं 3 इंच तो कहीं मुश्किल से 4 इंच ही रखा है। हैरानी की बात तो यह है कि ढलाई हुए अभी 24 घंटे भी ठीक से नहीं बीते थे कि सड़क की सतह पर एक गिली, कीचड़ जैसी परत उभर आई। गाँव वालों ने इसे ही सबूत बनाकर सीमेंट की क्वालिटी पर उंगली उठाई है।
”पैर पड़ते ही उखड़ गई,” ग्रामीण बोले—ये मज़ाक है!
पत्रकारों से बात करते हुए गाँव के लोग बेहद गुस्से में थे। उनका सीधा आरोप था कि निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा सीमेंट और रेत का मिश्रण मानकों को पूरा नहीं करता। कुछ ग्रामीणों ने मौके पर ही ज़मीन पर बैठकर सड़क की ढलाई को अपने पैर से खुरचकर दिखाया और कहा, “ये सड़क बनी है या हमारे साथ मज़ाक? देखिए, पैर रखते ही उखड़ गई!”
गाँव वालों ने ठेकेदार पर जो आरोप लगाए, वो ये हैं:
- कोई खबर नहीं: काम शुरू होने से पहले गाँव वालों या किसी जनप्रतिनिधि को भनक तक नहीं लगी—अचानक कंपनी वाले आए और काम शुरू कर दिया।
- रास्ता बंद: गाँव में आने-जाने वाले छोटे-बड़े वाहनों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं दिया गया, जिससे लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ी।
- टूटने लगी सड़क: ढलाई के बस अगले दिन ही सतह पर दरारें पड़ गईं और मिट्टी जैसी परत दिखने लगी।
- मोटाई में चोरी: एस्टीमेट 5 इंच का था, मगर ढलाई सिर्फ 3 या 4 इंच की ही की गई।
मुखिया निराला का गुस्सा: “गुपचुप काम शुरू कर दिया”
सरधो पंचायत के मुखिया विपिन कुमार निराला ने भी इस गुणवत्ता पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि:
”यह प्रोजेक्ट ग्रामीण कार्य विभाग, भागलपुर ने पायल कंस्ट्रक्शन को दिया है। मगर काम गुपचुप तरीके से शुरू कर दिया गया, किसी को बताया ही नहीं। हमने सहयोग किया भी, लेकिन इस घटिया काम को हम क्यों बर्दाश्त करें? मैंने तुरंत बीडीओ (BDO) और जूनियर इंजीनियर (JE) को फ़ोन किया और उन्हें गुणवत्ता की जांच के लिए तुरंत आने को कहा है।”
”अल्ट्राटेक है या मिट्टी का लेप?”
निर्माण स्थल पर ग्रामीण ठेकेदार के कर्मचारियों से भिड़ गए। जब सीमेंट का नाम अल्ट्राटेक बताया गया, तो गाँव वालों का गुस्सा और भड़का। उनका तर्क था कि अगर सीमेंट इतना अच्छा है, तो सड़क ढलाई के तुरंत बाद ऐसी क्यों दिख रही है।
ग्रामीणों ने सीधे सवाल किए:
- ”ये सीमेंट असली है ही नहीं।
- कल की ढली हुई सड़क आज ही उखड़ रही है।
- दस दिन बाद तो ये हाथ लगाते ही टूट जाएगी।
- ये सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, और हम इसे होने नहीं देंगे।”
डीएम को शिकायत की तैयारी, काम रोका गया
गुस्साए ग्रामीणों ने मिलकर सड़क निर्माण का काम पूरी तरह से रोक दिया। उन्होंने बताया कि अब वे भागलपुर के जिलाधिकारी (DM) के नाम एक विस्तृत शिकायत पत्र तैयार कर रहे हैं, ताकि इस घटिया निर्माण की निष्पक्ष जांच हो और दोषी कंपनी पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
आखिर सवाल तो विभाग की जिम्मेदारी पर भी है। ग्रामीण कार्य विभाग, भागलपुर ने पायल कंस्ट्रक्शन को काम दिया, लेकिन क्या विभागीय इंजीनियर मौके पर थे? उन्होंने ढलाई की मोटाई क्यों नहीं नापी? ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर अभी जांच नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये की यह सड़क बारिश के मौसम से पहले ही बर्बाद हो जाएगी।
जनता की मांग साफ है: काम गुणवत्तापूर्ण हो, मोटाई 5 इंच ही रखी जाए, और सही सामग्री इस्तेमाल हो।
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों और मुखिया के बयानों पर आधारित है। संबंधित विभाग या निर्माण कंपनी का पक्ष मिलते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।)








