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बिहार के जमुई में पुलिस कार्रवाई के दौरान बवाल, महिला अफसर की आंखों से छलके आंसू

On: September 7, 2025 10:34 AM
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बिहार के जमुई में पुलिस कार्रवाई के दौरान बवाल, महिला अफसर की आंखों से छलके आंसू
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जमुई (बिहार): बिहार के जमुई जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां अवैध शराब बनाने की सूचना पर छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि दर्जनों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और लाठी-डंडों से हमला किया। इस हमले में महिला एसआई समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में है।

घटना कब और कहां हुई?

यह घटना बरहट थाना क्षेत्र के कछुआ तरी गांव की है। शुक्रवार को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव में अवैध देसी शराब बनाई जा रही है। इसके बाद थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम वहां पहुंची। टीम में एसआई शुभम झा, महिला एसआई उर्मिला कुमारी और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

जांच के दौरान ग्रामीणों को जब इसकी भनक लगी तो वे आक्रोशित हो गए और अचानक बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया।

पुलिस पर हमला कैसे हुआ?

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, करीब 50 से अधिक ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया। इसके बाद लाठी-डंडों से हमला शुरू हो गया। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस के हथियार छीनने की भी कोशिश की। इस दौरान कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

  • महिला एसआई उर्मिला कुमारी को भीड़ ने घेर लिया। बताया जाता है कि वह काफी डरी हुई थीं और भावुक होकर रोने लगीं।
  • एसआई शुभम झा को ग्रामीणों ने लगभग 200 मीटर तक दौड़ाया।
  • एक कांस्टेबल को भी पकड़कर पीटा गया और उसे हाथ जोड़कर लोगों से माफी मांगनी पड़ी।

यह तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी अपनी जान बचाने के लिए भागते दिखे।

शराबबंदी और टकराव की पृष्ठभूमि

बिहार सरकार ने वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया था। इसके तहत न तो शराब का सेवन और न ही इसकी बिक्री की अनुमति है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बनाने और बेचने की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

पुलिस का कहना है कि इसी तरह की सूचना पर टीम गांव में गई थी। लेकिन वहां मौजूद लोग पुलिस की कार्रवाई से भड़क गए और हमला कर दिया।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि शराबबंदी के नाम पर ग्रामीणों को अक्सर परेशान किया जाता है। हालांकि किसी भी विवाद का समाधान हिंसा से नहीं हो सकता।

घायल पुलिसकर्मियों का इलाज

हमले में घायल पुलिसकर्मियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

  • महिला एसआई उर्मिला कुमारी
  • एसआई शुभम झा
  • कई कांस्टेबल और जवान

इन सभी को हल्की से लेकर गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि की है और कहा है कि दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई होगी।

प्रशासन का क्या कहना है?

जमुई पुलिस अधीक्षक (SP) ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि यह हमला बेहद गंभीर मामला है।

“अवैध शराब की सूचना पर पुलिस टीम को गांव भेजा गया था। वहां ग्रामीणों ने कानून अपने हाथ में ले लिया और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इसमें कई जवान घायल हुए हैं। वीडियो फुटेज और पहचान के आधार पर हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

SP ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस पर हमला करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

कानून व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पर ग्रामीणों का इस तरह हमला करना न केवल एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोग किस हद तक जाने को तैयार हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से राज्य में शराब की तस्करी और अवैध निर्माण की घटनाएं बढ़ी हैं। पुलिस जब इन पर कार्रवाई करती है तो कई बार इस तरह के टकराव सामने आ जाते हैं।

सामाजिक और प्रशासनिक नजरिया

घटना का एक और पहलू यह भी है कि ग्रामीण अक्सर पुलिस कार्रवाई को कठोर मानते हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि अगर वे कानून का पालन कराने न जाएं तो अवैध धंधे और बढ़ेंगे।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी झलकती है। अगर यह दूरी बनी रही तो अपराध नियंत्रण और मुश्किल होगा।

राजनीति में गर्माहट

बिहार में शराबबंदी पहले से ही एक राजनीतिक मुद्दा रहा है। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि शराबबंदी कानून कागज पर ही है और इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सख्ती से काम कर रही है और दोषियों को जल्द सजा मिलेगी।

आगे की कार्रवाई

  • पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है।
  • हमले में शामिल ग्रामीणों की पहचान की जा रही है।
  • वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार करने की तैयारी है।

जिला प्रशासन ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग ग्रामीणों की हिंसक प्रवृत्ति की निंदा कर रहे हैं, तो वहीं कुछ का कहना है कि प्रशासन को शराबबंदी कानून लागू करने के लिए नई रणनीति अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष

जमुई की यह घटना केवल एक पुलिस-ग्रामीण टकराव नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार में शराबबंदी कानून की स्थिति और प्रशासनिक चुनौतियों को सामने लाती है। सवाल यह है कि क्या पुलिस को कानून लागू कराने के लिए हमेशा इस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ेगा? और क्या अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाने के लिए केवल छापेमारी ही पर्याप्त है?

इस घटना ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली बल्कि ग्रामीण समाज की मानसिकता पर भी गहरे सवाल खड़े किए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में किस तरह की कार्रवाई करता है और क्या यह घटना बिहार की शराबबंदी नीति की समीक्षा का कारण बनेगी।

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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