मोतिहारी (बिहार): पूर्वी चंपारण के बाराचकिया क्षेत्र के किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी चकिया चीनी मिल के दिन बहुरने वाले हैं। इस मिल के पुनरुद्धार और नई चीनी मिल की स्थापना की संभावनाओं को तलाशने के लिए नई दिल्ली से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम शुक्रवार को चकिया पहुंची।
नेशनल फेडरेशन की टीम ने किया जमीनी निरीक्षण
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF), नई दिल्ली की टीम ने 10 अप्रैल 2026 को बाराचकिया का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य ‘एरिया स्टडी’ (क्षेत्रीय अध्ययन) करना था। टीम ने न केवल पुरानी चीनी मिल की वर्तमान स्थिति को देखा, बल्कि नई मिल के लिए प्रस्तावित जमीन का भी बारीकी से निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों ने यह जांचा कि क्या वहां की आधारभूत संरचना (Infrastructure) और जमीन नई तकनीक वाली मिल के लिए उपयुक्त है या नहीं।
किसानों से संवाद और डेटा संकलन
टीम ने केवल फाइलों तक ही सीमित न रहकर सीधे जमीन पर उतरकर जानकारी जुटाई:
- किसानों से बातचीत: टीम ने आसपास के गन्ना किसानों से मुलाकात की और उनसे गन्ना उत्पादन, उसकी सप्लाई और खेती में आने वाली समस्याओं पर चर्चा की।
- सरकारी विभागों से तालमेल: कृषि विभाग के अधिकारियों से गन्ने की खेती के विस्तार और उत्पादन के आंकड़ों पर लंबी चर्चा हुई।
- तकनीकी पहलुओं की जांच: सिंचाई (Minor Irrigation), जल निकासी (Drainage) और नहर विभाग के अधिकारियों से भी टीम ने तकनीकी डेटा साझा किया ताकि भविष्य में मिल को पानी और अन्य संसाधनों की कमी न हो।
क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई गति
इस सर्वे के बाद NFCSF अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो इसके कई बड़े फायदे होंगे:
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- किसानों को लाभ: स्थानीय गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें सही कीमत मिल सकेगी।
- रोजगार के अवसर: नई मिल शुरू होने से सैकड़ों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
- आर्थिक मजबूती: औद्योगिक विकास होने से पूरे बाराचकिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।






