पटना के एन कॉलेज में आयोजित बिहार छात्र संसद 2025 का आठवां सत्र इस बार ऐतिहासिक रहा। इस मंच ने बिहार की युवा प्रतिभाओं को न केवल पहचान दिलाई, बल्कि समाज और लोकतंत्र की दिशा तय करने का अवसर भी दिया।
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहे मुंगेर के मिमिक्री आर्टिस्ट संजीत कुमार संगम, जिन्हें पटना के IG विकास वैभव के हाथों सम्मानित किया गया। साथ ही, मुंगेर सेंट्रल के फाउंडर प्रियांशु कुमार और उभरते हुए छात्र स्पीकर शुभम कुमार को भी विशेष सम्मान से नवाज़ा गया।
🎭 संजीत कुमार संगम: मिमिक्री की दुनिया में बिहार का चमकता सितारा
पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब आया जब संजीत कुमार संगम को मंच पर बुलाया गया। संजीत को ‘बेस्ट मिमिक्री आर्टिस्ट’ के सम्मान से नवाज़ा गया।
- वह बिहार के पहले मिमिक्री आर्टिस्ट हैं जिन्हें इस स्तर पर सम्मानित किया गया।
- अपने क्षेत्र में वह पहले कलाकार हैं जिन्हें यूट्यूब सिल्वर बटन अवॉर्ड भी मिल चुका है।
- संजीत ने न केवल कला को मनोरंजन तक सीमित रखा, बल्कि इसे युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया।
यह सम्मान साबित करता है कि कला और मेहनत के बल पर कोई भी व्यक्ति समाज और राज्य के लिए गौरव बन सकता है।

🏛️ प्रियांशु कुमार: मुंगेर सेंट्रल के फाउंडर को मिला सम्मान
संजीत के बाद मंच पर बुलाए गए प्रियांशु कुमार, जो मुंगेर सेंट्रल के फाउंडर हैं।
उनके काम ने मुंगेर की युवा पीढ़ी को एक नई दिशा दी है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने मुंगेर की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है।
यह सम्मान उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बना।

🎤 शुभम कुमार: उभरते छात्र स्पीकर
कार्यक्रम में शुभम कुमार को भी ‘उभरते छात्र स्पीकर’ के रूप में सम्मानित किया गया। उनकी ओजस्वी और धारदार वाणी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
शुभम जैसे युवा वक्ता यह संदेश देते हैं कि आज का छात्र केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकता है।

👤 रिशांत राज: नेतृत्व और संगठन का चेहरा
रिशांत राज, जो Head of बिहार छात्र संसद, District Coordinator एवं Youth Parliament हैं, इस आयोजन के मुख्य नेतृत्वकर्ताओं में से एक रहे।
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उन्होंने मुंगेर से लेकर पटना तक इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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उनका नेतृत्व यह दर्शाता है कि युवाओं में संगठन क्षमता और लोकतांत्रिक सोच कितनी मजबूत हो सकती है।
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रिशांत राज की सक्रियता से यह भी साफ हुआ कि बिहार छात्र संसद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को नेतृत्व और जिम्मेदारी सिखाने का आंदोलन है।
उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि अगर युवा सही दिशा में आगे बढ़ें तो वे आने वाले कल के सफल नेता बन सकते हैं।

🌟 मंच पर शामिल हुईं बड़ी हस्तियाँ
बिहार छात्र संसद का महत्व इस बात से और बढ़ गया कि इसमें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय हस्तियाँ शामिल हुईं। इनमें प्रमुख रहे:
- शांभवी चौधरी – सांसद, समस्तीपुर
- विकास वैभव – IG, पटना (सम्मान वितरक)
- आनंद मिश्रा – पूर्व IPS अधिकारी
- श्रद्धा शर्मा – फाउंडर, Your Story
- बिहार सरकार के सड़क निर्माण मंत्री और अन्य विशिष्ट मेहमान
इन सभी ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी सोच को केवल नौकरी या निजी जीवन तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और लोकतंत्र की मजबूती में भी योगदान दें।
🏅 सम्मानित प्रतिभाओं ने बढ़ाया बिहार का मान
कार्यक्रम में मुख्य रूप से तीन नाम सबसे अधिक गूंजे –
- संजीत कुमार संगम (मिमिक्री आर्टिस्ट, मुंगेर)
- प्रियांशु कुमार (फाउंडर, मुंगेर सेंट्रल)
- शुभम कुमार (उभरते छात्र स्पीकर)
तीनों ही अपनी-अपनी पहचान और क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए युवाओं के आदर्श बनकर उभरे हैं।
📢 युवाओं के लिए प्रेरणा का मंच
बिहार छात्र संसद का मकसद केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है। यह मंच युवाओं को सोचने, बोलने और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हर युवा अपनी प्रतिभा को इसी तरह समाज के हित में लगाए तो बिहार की तस्वीर कितनी बदल सकती है?
🎤 लोकतंत्र की असली पाठशाला
बिहार छात्र संसद लोकतंत्र की असली पाठशाला है। यहाँ छात्र सीखते हैं कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।
यह मंच हर युवा को यह सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में बदलाव लाने के लिए सिर्फ़ नेताओं का इंतज़ार क्यों किया जाए, क्यों न खुद ही बदलाव की पहल की जाए।
🌍 समाज और बिहार पर असर
इस तरह के आयोजन से कई सकारात्मक बदलाव सामने आते हैं:
- कला और शिक्षा दोनों को बराबर महत्व मिलता है।
- युवा अपनी प्रतिभा को पहचानने और समाज से जोड़ने लगते हैं।
- बिहार की छवि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है।
- छात्रों में नेतृत्व और वक्तृत्व कला का विकास होता है।
✨ निष्कर्ष
बिहार छात्र संसद 2025 ने एक बार फिर साबित किया कि बिहार की धरती केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और समाज-निर्माण की भी मजबूत आधारशिला है।
संजीत कुमार संगम का सम्मान मिमिक्री कला के लिए ऐतिहासिक पल है। वहीं, प्रियांशु कुमार और शुभम कुमार की उपलब्धियाँ यह दिखाती हैं कि बिहार के युवा हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं।
यह क्षण न केवल तीनों सम्मानित प्रतिभाओं के लिए, बल्कि पूरे बिहार और विशेषकर मुंगेर के लिए गर्व का विषय है।












