हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 6 सितंबर 2025 (शनिवार) को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का विशेष महत्व है। खासतौर पर गणपति भक्तों के लिए यह तिथि और भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है।
आइए विस्तार से जानते हैं—अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखने वाले और केवल पूजा-पाठ करने वाले लोगों को आहार और परंपराओं को लेकर किन नियमों का पालन करना चाहिए।
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
- अनंत भगवान की पूजा – इस दिन भगवान विष्णु के ‘अनंत रूप’ की पूजा की जाती है।
- संकल्प सूत्र बांधना – पूजा के दौरान एक पवित्र सूत्र (अनंत सूत्र) हाथ में बांधा जाता है, जिसे 14 दिन तक धारण करने की परंपरा है।
- पुण्य फल प्राप्ति – धार्मिक मान्यता है कि इस दिन नियमपूर्वक व्रत करने और भगवान विष्णु का ध्यान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है।
- गणेश विसर्जन – महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में यह दिन गणेशोत्सव का अंतिम दिन होता है, जब भक्त उत्साहपूर्वक बप्पा का विसर्जन करते हैं।
व्रत रखने वाले भक्तों के लिए नियम
अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखने वाले लोग फलाहार का सेवन करते हैं। व्रत का मूल नियम है संयम और सात्त्विक आहार।
- नमक वर्जित – इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। चाहें सेंधा नमक ही क्यों न हो।
- एक बार फलाहार – पूरे दिन केवल एक बार फलाहार करने की परंपरा है।
- क्या खा सकते हैं
- दूध, दही, छाछ
- मौसमी फल (सेब, केला, अंगूर, अनार आदि)
- सलाद और सूखे मेवे (किशमिश, बादाम, काजू, अखरोट आदि)
- मीठे पकवान जैसे फलाहारी हलवा, साबूदाना खिचड़ी, लड्डू इत्यादि
- क्या नहीं खाना चाहिए
- मांसाहार, मदिरा
- प्याज और लहसुन
- तामसिक और अत्यधिक तला-भुना भोजन
बिना व्रत रखे पूजा करने वाले लोग क्या करें?
कई लोग स्वास्थ्य कारणों या अन्य कारणों से व्रत नहीं रखते। लेकिन फिर भी वे पूजा-पाठ अवश्य करते हैं। ऐसे लोगों को भी आहार संबंधी कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
- नमक से परहेज – चाहे व्रती हों या न हों, इस दिन नमक का सेवन करने से बचें।
- सात्त्विक भोजन – भोजन में केवल मीठा, फल, दूध, दही आदि लें।
- तामसिक आहार का त्याग – इस दिन मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन से पूरी तरह दूर रहें।
- हल्का और पचने वाला भोजन – दिनभर साधारण फलाहार या दूध-फल का सेवन कर सकते हैं।
पूजा की विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर या मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा/चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- अनंत सूत्र (कपड़े का पवित्र धागा) को हल्दी और केसर से रंगकर पूजा में रखें।
- भगवान विष्णु को फूल, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या ‘ॐ अनन्ताय नमः’ मंत्र का जाप करें।
- पूजा के बाद अनंत सूत्र को दाहिने हाथ (पुरुष) या बाएं हाथ (महिला) में बांधें।
परंपराओं से जुड़ी मान्यताएँ
- अनंत चतुर्दशी का व्रत 14 वर्षों तक निरंतर करने से जीवन में हर संकट दूर होता है।
- भगवान कृष्ण ने भी महाभारत काल में युधिष्ठिर को अनंत व्रत करने की सलाह दी थी, ताकि पांडवों के जीवन में शांति और समृद्धि लौट सके।
- महाराष्ट्र और गोवा में यह दिन सामाजिक उत्सव का रूप ले चुका है, जहां घर-घर से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन शोभायात्रा के साथ किया जाता है।
आधुनिक समय में आस्था और आहार
आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग पारंपरिक उपवास का पालन कठिन मानते हैं। फिर भी श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार फलाहार और सात्त्विक भोजन अपनाकर इस पर्व को मनाते हैं। वहीं, बिना व्रत रखने वाले लोग भी कम से कम इस दिन तामसिक भोजन और नमक का त्याग जरूर करते हैं।
क्या सावधानियां रखें?
- व्रत करते समय पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो।
- फलाहार बनाते समय तैलीय और मसालेदार चीजों से बचें।
- पूजा के दौरान धैर्य और एकाग्रता बनाए रखें।
- स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
निष्कर्ष
अनंत चतुर्दशी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सात्त्विक जीवन जीने का संदेश भी देती है। चाहे कोई व्रत रखे या केवल पूजा-पाठ करे, इस दिन नमक और तामसिक भोजन से दूरी बनाना, मीठे और फलाहारी आहार को अपनाना, तथा भगवान विष्णु की आराधना करना ही असली धर्म है।
अनंत चतुर्दशी 2025 पर श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ व्रत, पूजा और गणेश विसर्जन का पर्व मना रहे हैं। यह दिन भक्तों के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि लाए, यही मंगलकामना है।








