भागलपुर। पूर्वांचल और सीमांचल को जोड़ने वाली जीवन रेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पुल पर बने कई एक्सपेंशन जॉइंट्स में गैप बढ़ने से यहां से गुजरने वाले यात्री हर दिन डर के साए में सफर कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति को समय रहते ठीक नहीं किया गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
पुल की अहमियत
विक्रमशिला सेतु गंगा नदी पर बना बिहार का दूसरा सबसे लंबा पुल है। लगभग 5.75 किलोमीटर लंबा यह पुल भागलपुर जिले को पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और सहरसा जैसे जिलों से जोड़ता है। यही वजह है कि इसे सीमांचल और पूर्वांचल को जोड़ने वाली जीवन रेखा कहा जाता है।
रोजाना करीब 25 से 30 हजार वाहन इस पुल से गुजरते हैं। इनमें छोटे वाहनों से लेकर भारी मालवाहक ट्रक और बसें शामिल हैं। इतना बड़ा यातायात दबाव झेलने के बावजूद इस पुल की मरम्मत और रखरखाव पर पिछले कई वर्षों से कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया है।
एक्सपेंशन जॉइंट्स में बढ़ा गैप
तकनीकी जांच में सामने आया है कि पुल के 127 नंबर पाया से लेकर 133 नंबर पाया के बीच बने एक्सपेंशन जॉइंट्स में 2 इंच का गैप बढ़कर अब 5 से 6 इंच तक पहुंच गया है।
यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जाती। पुल पर खड़े होकर देखने पर नीचे से गंगा नदी साफ दिखाई देती है। वाहन गुजरने के दौरान कंपन और वाइब्रेशन लगातार महसूस होता है। यही वजह है कि यात्री और स्थानीय लोग इसे खतरे की घंटी मान रहे हैं।
2016 के बाद से नहीं हुआ बड़ा मरम्मत कार्य
अधिकारियों के मुताबिक, 2016 के बाद से विक्रमशिला सेतु का कोई बड़ा मरम्मती कार्य नहीं हुआ है। कई बार पुल निर्माण निगम को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
जिलाधिकारी और एनएच डिवीजन ने हाल ही में तकनीकी टीम से जांच कर मरम्मत का काम शुरू करने का निर्देश दिया है। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यात्रियों की प्रतिक्रिया
पुल से गुजरने वाले यात्रियों में डर साफ झलकता है।
भागलपुर निवासी मोहम्मद शाहरुख ने कहा –
“हम पुल पर जब खड़े होते हैं तो वाइब्रेशन साफ महसूस होता है। नीचे नदी दिखने लगी है। गैप बहुत बढ़ गया है। यह खतरे की घंटी है। सरकार को तुरंत मरम्मत करानी चाहिए।”
एक अन्य यात्री ने बताया कि,
“गाड़ियां जब ज्यादा संख्या में एक साथ गुजरती हैं तो कंपन और तेज हो जाता है। यह स्थिति सामान्य नहीं लगती। मरम्मतीकरण जरूरी है।”
जाम की समस्या भी बड़ी चुनौती
विक्रमशिला सेतु पर सिर्फ खराब हालत ही समस्या नहीं है, बल्कि जाम भी यहां रोजाना की परेशानी है।
वाहनों की भारी संख्या के कारण पुल पर कई बार घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। खासकर सुबह और शाम के समय जब स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने का समय होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम के दौरान कंपन और भी ज्यादा महसूस होता है क्योंकि वाहन लंबे समय तक पुल पर खड़े रहते हैं।
अधिकारियों का रुख
जिलाधिकारी ने एनएच डिवीजन को निर्देश दिया है कि पुल के जॉइंट्स की तकनीकी जांच की जाए और मरम्मतीकरण जल्द शुरू हो।
अधिकारियों का कहना है कि –
- एक्सपेंशन जॉइंट्स का गैप सामान्य सीमा से अधिक हो चुका है।
- बरसात के मौसम में वॉटर लॉगिंग से पुल की स्थिति और खराब हो सकती है।
- तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द ही सर्वे करेगी।
हालांकि मरम्मत कार्य कब शुरू होगा, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की गई है।
विशेषज्ञों की राय
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपेंशन जॉइंट्स में गैप का बढ़ना गंभीर संकेत है।
उनके अनुसार –
- पुल की संरचना पर भारी दबाव है।
- भारी वाहनों का लगातार आवागमन स्थिति को और खराब कर रहा है।
- अगर समय रहते रिपेयरिंग नहीं हुई तो पुल की मजबूती पर खतरा बढ़ जाएगा।
- फिलहाल तुरंत रिपेयरिंग, रिइंफोर्समेंट और ट्रैफिक कंट्रोल जरूरी है।
बारिश से और बिगड़ रही हालत
बारिश के मौसम में विक्रमशिला सेतु पर वॉटर लॉगिंग की समस्या बढ़ जाती है।
पुल की सतह पर पानी भर जाने से एक्सपेंशन जॉइंट्स और कमजोर हो जाते हैं। पानी के दबाव और जंग (रस्ट) के कारण पुल की आयु घटने की आशंका भी बढ़ जाती है।
बिहार में पुलों के गिरने की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुलों के ढहने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इन घटनाओं के बाद विक्रमशिला सेतु को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। चूंकि यह पुल कई जिलों को जोड़ता है, इसलिए इसके क्षतिग्रस्त होने पर यातायात और आर्थिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
समानांतर पुल का काम 2029 तक
विक्रमशिला सेतु के समानांतर एक नया पुल बनाने का काम चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह काम 2029 तक पूरा होना है।
लेकिन तब तक मौजूदा पुल ही पूरे क्षेत्र के यातायात का मुख्य सहारा रहेगा। इसी वजह से मौजूदा पुल की मरम्मत और रखरखाव को लेकर तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
आर्थिक और सामाजिक असर
विक्रमशिला सेतु का महत्व सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है। यह पुल भागलपुर की आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक आदान-प्रदान की रीढ़ है।
अगर यह पुल बंद हुआ या क्षतिग्रस्त हुआ तो –
- सीमांचल और पूर्वांचल के बीच का संपर्क टूट जाएगा।
- व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ेगा।
- हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी।
लोगों की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि –
- पुल की तत्काल तकनीकी जांच हो।
- मरम्मतीकरण बिना देरी शुरू किया जाए।
- भारी वाहनों के दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।
- समानांतर पुल का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जाए।
निष्कर्ष
विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि पूरे सीमांचल और पूर्वांचल की जीवन रेखा है।
गैप बढ़ने और लगातार महसूस हो रहे कंपन ने इसे खतरे की घंटी बना दिया है। यात्रियों और स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द से जल्द कदम उठाएं।
अगर समय रहते मरम्मतीकरण नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह पुल कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।








