बिहार 

चाँद पर तिरंगा लहराने के बाद, इस घोषणा ने क्यों पूरे देश को कर दिया गर्व से सरोबार? जानें पूरी कहानी

On: September 26, 2025 10:56 PM
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After hoisting the tricolour on the moon, why did this announcement fill the entire nation with pride? Know the full story
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23 अगस्त, 2023: यह सिर्फ एक तारीख नहीं, यह हर भारतीय की छाती चौड़ा कर देने वाला दिन है! इस दिन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा के सबसे कठिन इलाके—दक्षिणी ध्रुव—पर फतेह हासिल की। ज़रा सोचिए, भारत यह असाधारण कारनामा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया! यह क्षण केवल एक तकनीकी सफलता नहीं था; यह ‘नए भारत’ के उस अडिग आत्मविश्वास का शंखनाद था, जिसने दिखा दिया कि हमारा संकल्प आकाश से भी ऊँचा है।

​इस अविस्मरणीय उपलब्धि को इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर करने के लिए, भारत सरकार ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह निर्णय उन गुमनाम भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के अथक समर्पण और जुनून को एक सच्चा सलाम है, जिनकी बदौलत भारत आज अंतरिक्ष की रेस में किसी से पीछे नहीं।

​चंद्रयान-3: एक जीत जो कई कहानियाँ कहती है

​चंद्रमा पर उतरना तो महज़ ट्रेलर था; चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी इसके कई आयामों में छिपी है:

  • जटिलता पर प्रभुत्व: दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करना चाय का प्याला नहीं था। वहाँ का ऊबड़-खाबड़ terrain, शून्य प्रकाश की चुनौतियाँ—ये सब मिलकर इसे अंतरिक्ष अन्वेषण का सबसे बड़ा जोखिम बनाते हैं। इसरो ने साबित कर दिया कि वह ‘मुश्किल’ को भी ‘मुमकिन’ में बदल सकता है।
  • वैश्विक मानचित्र पर नया स्थान: इस सफलता ने भारत को उन चार-पाँच चुनिंदा देशों की विशिष्ट श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया, जो चंद्रमा को छू पाए हैं। भारत ने अब दुनिया को दिखा दिया है कि वह केवल फॉलोअर नहीं, बल्कि लीडर है।
  • आत्मनिर्भरता का दमख़म: यह मिशन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक की नींव पर खड़ा था। सबसे हैरत की बात यह है कि इसकी लागत अन्य देशों के हॉलीवुड मूवी बजट से भी कम थी। यह सही मायने में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘कम में ज़्यादा’ (frugal engineering) की भावना को चरितार्थ करता है।
  • बच्चों के लिए प्रेरणा का इंजेक्शन: इस लैंडिंग को देखकर लाखों बच्चों की आँखों में जो चमक आई है, वह अमूल्य है। इसने उन्हें STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) की दुनिया में उतरने के लिए एक शक्तिशाली न्योता दिया है।

​’राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ का मर्म: जुनून को सम्मान

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त, 2023 को बेंगलुरु में इसरो वैज्ञानिकों के बीच खड़े होकर, 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ मनाने की घोषणा की। यह केवल एक सरकारी छुट्टी नहीं है, बल्कि यह उन वैज्ञानिकों के ‘पागलों जैसे जुनून’ को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने दशकों तक इस सपने को जिया है।

​यह दिन हमें हर साल याद दिलाएगा कि कैसे चुनौतियों के बावजूद हर बार उठ खड़ा होना पड़ता है। यह दिन छात्रों और आम जनता के बीच अंतरिक्ष विज्ञान की ललक पैदा करेगा। यह एक आधारशिला है—गगनयान (मानव मिशन) और आदित्य-एल1 (सूर्य मिशन) जैसे भविष्य के बड़े लक्ष्यों के लिए।

​भारत का अंतरिक्ष सफर: कच्चे माल से महाशक्ति तक

​भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम कोई इत्तिफ़ाक़ नहीं है। इसकी शुरुआत 1960 के दशक में कुछ दूरदर्शी लोगों के एक साइकिल पर रॉकेट ले जाने जितनी साधारण थी। शुरुआती विफलताएँ आईं, मगर हमने हिम्मत नहीं हारी। ‘आर्यभट्ट’ (1975) से लेकर मंगलयान की पहली कोशिश में सफलता तक, भारत ने हमेशा ‘कम में बढ़िया’ काम करने का हुनर दिखाया है।

​चंद्रयान-3 की जीत इस लंबी, संघर्षपूर्ण यात्रा का सबसे सुनहरा पड़ाव है। इसने यह मुहर लगा दी है कि भारत अब अंतरिक्ष की दौड़ में सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि मुख्य दावेदार है।

​निष्कर्ष: यह ‘जय विज्ञान’ की हुंकार है

‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ अब हर भारतीय की रगों में दौड़ने वाला गर्व का एक अहसास बन चुका है। यह दिन हमें सिखाता है कि जब एक राष्ट्र के रूप में हम एकजुट होकर लक्ष्य साधते हैं, तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती। चंद्रयान-3 ने साबित कर दिया कि भारत अब आँखें बंद करके नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भरी नज़रों से भविष्य की ओर देख रहा है।

​23 अगस्त, ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’, भारत के उस अदम्य साहस का प्रमाण है जो हार मानने को तैयार नहीं। यह एक ऐसा दिन है जो हर भारतीय को अपने सीने पर हाथ रखकर ‘जय विज्ञान’ का नारा लगाने के लिए प्रेरित करता है।

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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