पटना/वाराणसी: भारतीय रेलवे में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बार फिर शर्मनाक घटना सामने आई है। वाराणसी की रहने वाली एक पेशेवर मेकअप आर्टिस्ट स्वीटी सिंह ने चलती ट्रेन में न केवल छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों का सामना किया, बल्कि विरोध करने पर आरोपी ने उन्हें थप्पड़ भी जड़ दिया। पीड़िता ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी आपबीती साझा करते हुए रेलवे पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
स्वीटी सिंह अपने काम के सिलसिले में अपनी छोटी बहन और एक सहेली के साथ वाराणसी से पटना गई थीं। काम खत्म करने के बाद, वे रात करीब 12 बजे की ट्रेन से वापस लौट रही थीं। घटना आरा स्टेशन के आसपास की है। पीड़िता के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति उनकी सीट के सामने आकर बैठ गया और कुछ देर बाद उनके सामने वाली बर्थ पर लेटकर अश्लील हरकतें करने लगा।
विरोध करने पर मिला थप्पड़
पीड़िता ने बताया कि जब उन्होंने और उनके साथियों ने उस व्यक्ति की हरकतों को नोटिस किया, तो उन्होंने साक्ष्य के तौर पर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जब आरोपी को पता चला कि उसकी करतूत रिकॉर्ड की जा रही है, तो वह हिंसक हो गया। उसने पीड़िता को ज़ोरदार थप्पड़ मारा। पीड़िता का कहना है कि जिस घर में उन्हें कभी किसी ने ऊंची आवाज में नहीं डांटा, वहां एक अनजान व्यक्ति ने सरेआम उन पर हाथ उठाया, जिससे वे गहरे सदमे में हैं।
पुलिस और व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद पीड़िता ने जब ट्रेन में मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस से मदद मांगी, तो उन्हें कथित तौर पर निराशा ही हाथ लगी। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय उन्हें वापस आरा या दानापुर जाकर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की सलाह दी।
”पुलिस ने कहा कि हम अभी सिर्फ लिखकर आगे बढ़ा सकते हैं, आपको वापस जाकर शिकायत करनी होगी। बिना किसी गलती के थप्पड़ खाने के बाद मदद न मिलना बहुत निराशाजनक था।” — स्वीटी सिंह (पीड़िता)
“वीडियो न होता तो कोई यकीन नहीं करता”
स्वीटी ने बताया कि शुरुआत में उनके परिवार वाले लोक-लाज के डर से वीडियो सार्वजनिक करने के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाई। उन्होंने कहा कि अगर आज उनके पास वह वीडियो सबूत के तौर पर नहीं होता, तो शायद कोई उनकी बात पर यकीन नहीं करता। उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया जो इसे ‘पब्लिसिटी स्टंट’ कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ना कोई फेम पाने का जरिया नहीं है।
महिला सुरक्षा: एक बड़ा प्रश्नचिह्न
यह घटना दर्शाती है कि ट्रेनों में सफर करने वाली अकेली महिलाएं या युवतियां आज भी कितनी असुरक्षित महसूस करती हैं। घटना के बाद से पीड़िता मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है ताकि भविष्य में किसी और लड़की के साथ ऐसा व्यवहार न हो।
संपादकीय टिप्पणी: रेलवे प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनानी चाहिए ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ हो और महिलाएं सुरक्षित यात्रा कर सकें।






