भागलपुर में रविवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। बरारी और नवगछिया को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 4 और 5 के बीच का एक बड़ा स्लैब टूटकर गंगा नदी में समा गया। राहत की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी के कारण समय रहते पुल को खाली करा लिया गया था, जिससे कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
रात करीब 1 बजे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, रविवार रात लगभग 11 बजे पोल नंबर 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट में बड़ा गैप देखा गया था। एक वाहन चालक ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही रोक दी। इसके कुछ देर बाद, रात करीब 12:55 बजे पुल का वह हिस्सा ढह गया।
पुल टूटने के बाद दोनों ओर का संपर्क पूरी तरह कट गया है। मौके पर जिलाधिकारी (DM) डॉ. नवल किशोर चौधरी और एसएसपी (SSP) प्रमोद कुमार यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंच चुके हैं।
प्रशासन की अपील: वैकल्पिक मार्ग अपनाएं
एसएसपी भागलपुर ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सोमवार से क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे।
- वैकल्पिक रास्ता: डीएम ने यात्रियों और मालवाहक वाहनों को मुंगेर होकर यात्रा करने की सलाह दी है।
- जांच शुरू: पुल निर्माण निगम के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और तकनीकी कारणों की जांच की जा रही है।
- अफवाहों से बचें: प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।
8 साल से नहीं हुई थी बड़ी मरम्मत
विक्रमशिला सेतु की हालत पिछले कुछ समय से चिंताजनक बनी हुई थी। खबरों के अनुसार, साल 2016-17 के बाद से इस पुल की कोई ठोस तकनीकी मरम्मत नहीं हुई है।
- सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त: हाल ही में पिलर नंबर 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल टूटने की खबरें आई थीं।
- बढ़ता दबाव: इस पुल से रोजाना 20 से 25 हजार गाड़ियां गुजरती हैं। भारी ट्रैफिक और ट्रकों के दबाव के कारण एक्सपेंशन जॉइंट्स में पहले से ही 4 से 5 इंच का अंतर आ गया था
- पुराना इतिहास: साल 2018 में एक मुंबई की एजेंसी ने साढ़े 12 करोड़ की लागत से इसके बेयरिंग बदले थे, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि पुल को और अधिक देखभाल की जरूरत थी।
विक्रमशिला सेतु: एक नजर में
- लंबाई: 4.7 किलोमीटर।
- महत्व: यह पुल एनएच-33 और एनएच-31 को जोड़ता है, जो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच लाइफलाइन का काम करता है।
- निर्माण: इसका निर्माण यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने किया था और 2001 में इसका उद्घाटन हुआ था।
वर्तमान में पुल के दोनों ओर पुलिस बल तैनात है और भारी वाहनों को वापस लौटाया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे इस मार्ग पर जाने से बचें।






