मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूर्वी चम्पारण जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। जिले के सभी 27 प्रखंडों में एक-एक मॉडल विद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी (DM) ने निर्माणाधीन मॉडल स्कूल का निरीक्षण कर काम की गुणवत्ता और गति को परखा।
जिला अधिकारी ने किया लखौरा स्थित निर्माणाधीन स्कूल का निरीक्षण
पूर्वी चम्पारण के जिला अधिकारी ने श्री रामदवन विभीषण उच्च माध्यमिक (+2) विद्यालय, लखौरा का दौरा किया। यहाँ बन रहे मॉडल स्कूल के निर्माण कार्य का बारीकी से निरीक्षण करते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
मॉडल स्कूल की मुख्य विशेषताएँ और आधुनिक शिक्षा
इन विद्यालयों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। यहाँ की शिक्षा पद्धति पारंपरिक स्कूलों से अलग और आधुनिक होगी:
- आधुनिक तकनीक: इन स्कूलों में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और लेटेस्ट शिक्षण विधियों का उपयोग होगा।
- विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती: माध्यमिक स्तर (9वीं-10वीं) के लिए संगीत, ललित कला और शारीरिक शिक्षा समेत 8 शिक्षक होंगे। वहीं, उच्च माध्यमिक (11वीं-12वीं) के लिए 16 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
- पारदर्शी चयन प्रक्रिया: शिक्षकों की भर्ती उनकी योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू के आधार पर पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होगी।
मेधावी छात्रों को मिलेगा नामांकन का सुनहरा मौका
इन मॉडल स्कूलों में प्रवेश पाना मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर होगा। नामांकन के लिए कुछ प्रमुख शर्तें तय की गई हैं:
- मेरिट आधारित दाखिला: NMMS (नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप) परीक्षा में 50% या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- किफायती शिक्षा: यहाँ की नामांकन फीस अन्य सामान्य सरकारी विद्यालयों के बराबर ही होगी, ताकि गरीब मेधावी छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा के नए मानक स्थापित करेंगे ये विद्यालय
जिला अधिकारी के अनुसार, ये मॉडल स्कूल न केवल बच्चों को शिक्षित करेंगे, बल्कि अपने आसपास के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक मार्गदर्शक (Mentor) के रूप में भी कार्य करेंगे। यहाँ उपलब्ध संसाधनों को अन्य स्कूलों के साथ साझा किया जाएगा, जिससे पूरे जिले के शैक्षणिक स्तर में सुधार आएगा।
पूर्वी चम्पारण के बच्चों के लिए अब अपने ही प्रखंड में उच्च स्तरीय और आधुनिक शिक्षा प्राप्त करना एक हकीकत बनने जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन स्कूलों को जिले में ‘एक्सीलेंस सेंटर’ के रूप में विकसित करना है।








