बिहार 

मोतिहारी: गेहूं की पैदावार जांचने के लिए खेत पहुंचे उप निदेशक, फसल कटनी प्रयोग का लिया जायजा

On: April 10, 2026 9:10 PM
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बिहार में फसलों की पैदावार का सही आंकलन करने के लिए सरकारी स्तर पर ‘फसल कटनी प्रयोग’ (Crop Cutting Experiment) अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में मोतिहारी सदर प्रखंड के रूलही पंचायत में राज्य स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में गेहूं की फसल की कटाई और वजन का परीक्षण किया गया।

​पटना से आए उप निदेशक ने खुद किया निरीक्षण

​मोतिहारी के रूलही ग्राम में किसान सुधीर कुमार के खेत (खेसरा नंबर 293) पर आयोजित इस प्रयोग का निरीक्षण करने के लिए अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (बिहार, पटना) के उप निदेशक श्री भीम शर्मा पहुंचे। उनकी देखरेख में फसल की कटाई की प्रक्रिया पूरी की गई।

​प्रखंड कृषि पदाधिकारी, श्री रमण कुमार श्रीवास्तव ने इस प्रयोग को संपन्न कराया। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आंकड़ों में किसी भी प्रकार की गलती न हो और किसानों को उनकी मेहनत का सही विवरण मिल सके।

​क्या रहे फसल कटनी के नतीजे?

​सटीक उत्पादकता जानने के लिए खेत में एक निश्चित माप का चयन किया गया था। जांच के दौरान:

  • निर्धारित क्षेत्र: 10 मीटर लंबा और 5 मीटर चौड़ा हिस्सा।
  • कुल पैदावार: इस हिस्से से 14.210 किलो गेहूं प्राप्त हुआ।

​इन आंकड़ों के आधार पर ही पूरे जिले और राज्य में गेहूं की औसत उत्पादकता का निर्धारण किया जाएगा।

​क्यों जरूरी है यह फसल कटनी प्रयोग?

​आम जनता और किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं है। इसके कई लाभ हैं:

  1. फसल सहायता योजना: यदि प्राकृतिक आपदा के कारण पैदावार कम होती है, तो इन्हीं आंकड़ों के आधार पर किसानों को सहायता राशि (मुआवजा) दी जाती है।
  2. सटीक आंकड़े: इससे सरकार को पता चलता है कि इस साल राज्य में कुल कितना अनाज पैदा होगा।
  3. कल्याणकारी योजनाएं: भविष्य की कृषि नीतियों और खाद-बीज की आपूर्ति की योजना बनाने में ये आंकड़े सहायक होते हैं।

​मौके पर मौजूद रहे कई अधिकारी

​इस निरीक्षण के दौरान जिला और प्रखंड स्तर के सांख्यिकी विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी कृष्ण कुमार मांझी, आशुतोष कुमार मिश्रा, और आलोक कुमार सिंह शामिल थे। साथ ही किसान सलाहकार अनामिका देवकुलियार और अफसारूल हक ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

संपादकीय नोट: फसल कटनी प्रयोग कृषि विभाग और सांख्यिकी विभाग का एक संयुक्त प्रयास है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सही प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Sachcha Samachar Desk

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