बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में भारत-नेपाल सीमा सड़क के निर्माण कार्य में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासन ने बड़ी पहल की है। सिकरहना (ढाका) के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी विवादों को सुलझाया, जिसके बाद अब सड़क निर्माण का काम फिर से शुरू हो गया है।
एसडीएम के नेतृत्व में हुआ निर्माण स्थलों का निरीक्षण
9 अप्रैल 2026 को एसडीएम सिकरहना ने ढाका और घोड़ासहन प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ ढाका और घोड़ासहन के अंचलाधिकारी (CO), पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता, सहायक अभियंता (AE), कनीय अभियंता (JE) और संबंधित ठेकेदार मौजूद रहे।
अधिकारियों की इस टीम ने उन सभी ‘हिंड्रेंस पॉइंट्स’ (बाधा वाले स्थलों) का बारीकी से निरीक्षण किया, जहां स्थानीय रैयतों (जमीन मालिकों) की आपत्तियों के कारण सड़क का काम रुका हुआ था।
इन गांवों में दूर हुआ विवाद
प्रशासनिक टीम ने ढाका और घोड़ासहन प्रखंड के आधा दर्जन से अधिक गांवों का दौरा किया। निरीक्षण के दायरे में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल थे:
- ढाका प्रखंड: तेलहारा, खरूही बारा फरीद और खरुआ चैनपुर मौजा।
- घोड़ासहन प्रखंड: बसंतपुर, जमुनिया कवैया, झरोखर और बिजबनी मौजा।
बातचीत से निकला समाधान, शुरू हुआ निर्माण कार्य
निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने उन ग्रामीणों और जमीन मालिकों से सीधे संवाद किया जो सड़क निर्माण में अवरोध पैदा कर रहे थे। प्रशासन की समझाइश और कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करने के बाद, रैयतों की समस्याओं को सुना गया और मौके पर ही अवरोध (Hindrance) को समाप्त करवाया गया।
सहमति बनने के तुरंत बाद संबंधित एजेंसी ने निर्माण कार्य फिर से प्रारंभ कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस सड़क का सामरिक और आर्थिक महत्व काफी अधिक है, जिससे स्थानीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।






