तमिलनाडु के मदुरै की एक अदालत ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कस्टडी में बाप-बेटे की बेरहमी से हत्या करने के जुर्म में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा (सजा-ए-मौत) सुनाई है। जज मुथू कुमारन ने फैसला सुनाते हुए सख्त टिप्पणी की और कहा कि यह अपराध ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rare of the rarest) श्रेणी में आता है।
”तुम सोच रहे थे 14 साल में बाहर आ जाओगे, पर अब कभी नहीं”
सुनवाई के दौरान जब 9 पुलिसकर्मी कटघरे में खड़े थे, तब जज साहब ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, “आप सोच रहे होंगे कि 14 साल की सजा काटकर आप नई जिंदगी शुरू करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं होगा। अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि आप सभी को फांसी की सजा दी जाए।”
हैरानी की बात यह रही कि जज ने आदेश दिया कि इन पुलिसकर्मियों को दो बार फांसी दी जाएगी—एक बार पिता की हत्या के लिए और दूसरी बार बेटे की हत्या के लिए। जब तक उनके प्राण न निकल जाएं, उन्हें फांसी के फंदे पर लटकाए रखा जाए। यह सुनकर पुलिसकर्मियों की आंखों में आंसू आ गए।
क्या था पूरा मामला? (2020 का वो काला दिन)
यह घटना जून 2020 की है, जब पूरा देश कोरोना लॉकडाउन की गिरफ्त में था। तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के सातानुकुलम थाने की पुलिस गश्त पर थी।
- विवाद की शुरुआत: 59 साल के पी. जयराम की मोबाइल शॉप खुली थी। पुलिस को आता देख उन्होंने शटर थोड़ा नीचे किया, लेकिन बातों-बातों में पुलिस की कार्यशैली पर कुछ तीखी टिप्पणी कर दी।
- अहंकार की लड़ाई: यह बात इंस्पेक्टर श्रीधर के ‘ईगो’ पर लग गई। 19 जून की शाम पुलिस जयराम को उठाकर थाने ले आई।
- बेटे की कोशिश: जब बेटे जे. वेनिक्स को पता चला, तो वह पिता को बचाने थाने पहुंचा। वहां बहस हुई और पुलिस ने बेटे को भी अंदर डाल दिया।
थाने के अंदर दी गई रूह कंपा देने वाली यातनाएं
अदालत में पेश की गई 2427 पन्नों की सीबीआई चार्जशीट और एक महिला पुलिसकर्मी की गवाही ने सबको झकझोर दिया।
- बाप-बेटे को निर्वस्त्र कर मेज पर उल्टा लिटाया गया और डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा गया कि फर्श खून से भर गया।
- पुलिस वालों ने उनसे खुद अपना खून साफ करवाया ताकि कोई सबूत न बचे।
- अगले दिन जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो उनके कपड़े खून से लथपथ थे, लेकिन पुलिस के प्रभाव में उन्हें ‘फिट’ बता दिया गया।
जेल में तोड़ा दम, फिर भड़का जनाक्रोश
जज के सामने पेशी के वक्त पुलिस ने उन्हें इस तरह घेरा था कि उनकी चोटें छिप जाएं। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
- 22 जून 2020: बेटे वेनिक्स की अस्पताल में मौत हो गई।
- 23 जून 2020: पिता जयराम ने भी दम तोड़ दिया।
इस खबर ने पूरे देश में आग लगा दी। व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दीं और लोग सड़कों पर उतर आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया और जांच सीबीआई को सौंपी।
आरोपियों की सूची और कोर्ट का कड़ा रुख
कुल 10 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज हुआ था, जिनमें से एक सब-इस्पेक्टर की कोरोना से मौत हो गई। बाकी बचे 9 पुलिसकर्मियों (जिनमें इंस्पेक्टर श्रीधर और अन्य शामिल हैं) को दोषी पाया गया।
मुख्य आरोपी ने सरकारी गवाह बनने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि थाने का इंचार्ज होने के नाते वह सबसे बड़ा जिम्मेदार है।
संपादकीय टिप्पणी: यह फैसला समाज में यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वो वर्दीधारी ही क्यों न हो। रक्षक जब भक्षक बन जाए, तो न्याय का डंडा इसी तरह चलता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं बल्कि जनता को जागरूक करना है।






