मोतिहारी, पूर्वी चंपारण: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिले के रघुनाथपुर क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच स्थानीय विधायक का एक वीडियो सामने आया है, जिसने संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जहरीली शराब का कहर: 10 की मौत, कई अस्पताल में भर्ती
रघुनाथपुर इलाके में शुक्रवार से शुरू हुआ मौत का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अवैध शराब के सेवन के कारण अब तक 10 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं, 20 से अधिक लोग गंभीर स्थिति में अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि शराब में मिथाइल अल्कोहल की अत्यधिक मात्रा होने के कारण लोगों के शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया। मरने वालों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर और किसान शामिल हैं, जो परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
त्रासदी के बीच उत्सव: विधायक की भूमिका पर उठे सवाल
जहां एक तरफ पूरा इलाका इन मौतों से सदमे में है, वहीं हरसिद्धि के विधायक कृष्णनंदन पासवान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा के 46वें स्थापना दिवस के अवसर पर विधायक अपने रघुनाथपुर स्थित आवास पर समर्थकों के साथ लड्डू बांटते और खुशियां मनाते नजर आए।
जब इलाके में लोग अपनों को खोने का गम मना रहे थे, तब विधायक का मिठाई खाना और खिलाना स्थानीय लोगों को रास नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि से इस दुख की घड़ी में सहानुभूति की उम्मीद थी, न कि जश्न की।
प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। एसपी स्वर्ण प्रभात ने जानकारी दी कि:
- शराब के अवैध कारोबार से जुड़े 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
- पूरे इलाके में सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
- जिलाधिकारी ने शराबबंदी कानून को और अधिक सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, इस मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार और विधायक दोनों पर निशाना साधा है। आरजेडी (RJD) नेताओं का कहना है कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह विफल साबित हो रही है और सत्ता पक्ष के लोग जनता के प्रति असंवेदनशील हो गए हैं।
शराबबंदी और सुरक्षा पर उठते सवाल
बिहार में साल 2016 से शराबबंदी लागू है, लेकिन मोतिहारी की इस घटना ने एक बार फिर इसकी जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। अवैध शराब का काला कारोबार आज भी गरीब तबके के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी जरूरी है।
- जहरीली शराब के खतरों के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान की कमी है।
- स्थानीय स्तर पर पुलिस और माफिया के गठजोड़ को तोड़ना अनिवार्य है।
रघुनाथपुर के पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन मौतों के असली गुनहगारों को सजा दिला पाएगा? और क्या हमारे जनप्रतिनिधि जनता के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझेंगे?
खास रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






